दूरसंचार विभाग की डिजिटल भारत निधि के तहत आज नई दिल्ली के संचार भवन में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को गति देने हेतु राज्य के नेतृत्व वाले मॉडल के तहत संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
छत्तीसगढ़ राज्य में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), दूरसंचार विभाग, छत्तीसगढ़ सरकार, छत्तीसगढ़ राज्य भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (सीएसबीआईएल), भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (सीएचआईपीएस) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के प्रशासक श्याममल मिश्रा, छत्तीसगढ़ सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव अंकित आनंद, छत्तीसगढ़ स्टेट भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (सीएसबीआईएल) के प्रबंध निदेशक मयंक अग्रवाल, (एंटरप्राइज बिजनेस – ईबी), भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के निदेशक, पापा सुधाकरा राव, दूरसंचार विभाग के डीडीजी (एबीपी कार्यान्वयन-I) दिनेश कुमार गर्ग, डीबीएन और बीएसएनएल के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते पर हस्ताक्षर कार्यक्रम के त्वरित कार्यान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और यह ग्रामीण डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, लास्ट-मील कनेक्टिविटी को बढ़ाने और समावेशी डिजिटल विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी थी, इसका उद्देश्य मौजूदा भारतनेट नेटवर्क को उन्नत, सुदृढ़ और विस्तारित करना था ताकि मांग के आधार पर सभी ग्राम पंचायतों और गांवों को मजबूत और भविष्य के लिए तैयार ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके।
छत्तीसगढ़ में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत, यह परियोजना छत्तीसगढ़ राज्य भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (सीएसबीआईएल) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 11,682 ग्राम पंचायतें शामिल होंगी, जिनमें नेटवर्क की मजबूती के लिए प्रथम चरण की 4,048 ग्राम पंचायतों को लीनियर से रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड करके, द्वितीय चरण की 5,964 ग्राम पंचायतों को कवर करके और 1,670 नवगठित ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, लास्ट-मील कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 8,328 गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी।
सरकार ने छत्तीसगढ़ में इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए 3,942 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। इस पहल से भारत सरकार की वित्तीय सहायता से तीन लाख से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में घरों में फाइबर कनेक्शन मिलने की उम्मीद है और राज्य के ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं सहित डिजिटल सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा।
इस समझौते से छत्तीसगढ़ में कार्यक्रम के क्रियान्वयन में तेजी आने और डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था की परिकल्पना के आगे बढ़ने की उम्मीद है।
डिजिटल भारत निधि के बारे में
डिजिटल भारत निधि (पूर्व नाम यूएसओएफ) भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 1 अप्रैल, 2002 से प्रभावी है। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अनुसार, सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष अब डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) बन गया है। डीबीएन का दायित्व ग्रामीण, दूरस्थ और शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं की उपलब्धता और वितरण को बढ़ावा देकर सार्वभौमिक सेवा का समर्थन करना है। यह संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (डीओटी) का एक संबद्ध कार्यालय है।
डीबीएन के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए, इसमें भारतनेट, 4जी संतृप्ति परियोजना, आकांक्षी जिलों के उन क्षेत्रों में मोबाइल सेवा का प्रावधान है जहां अभी तक मोबाइल सेवा उपलब्ध नहीं है, इसके अलावा वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों, हिमालयी और सीमावर्ती क्षेत्रों, द्वीपों और उत्तर पूर्वी क्षेत्रों में मोबाइल सेवाएं प्रदान करना शामिल हैं।
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