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Signing of Reform-Linked MoUs with Mizoram and Ladakh under Jal Jeevan Mission 2.0
भारत

जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत मिजोरम और लद्दाख के साथ सुधार आबद्ध समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर

जल जीवन मिशन 2.0 के सुधार आबद्ध क्रियान्वयन को समूचे देश में शुरू करने का काम जारी है। इसी क्रम में मिजोरम और लद्दाख ने आज केंद्र सरकार के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर संवहनीय, पारदर्शी और समुदायिक नेतृत्व वाली ग्रामीण पेयजल सेवा डिलीवरी के लिए एक सुव्यवस्थित सुधार फ्रेमवर्क के प्रति समर्पण प्रकट किया।

सुधार आबद्ध करार में जल जीवन मिशन 2.0 के लक्ष्यों के अनुरूप ग्रामीण जल प्रबंधन के ग्राम पंचायत के नेतृत्व वाले, सेवा आधारित और समुदाय केंद्रित मॉडल का प्रावधान किया गया है।

इस करार के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर ग्रामीण परिवार को मजबूत जन भागीदारी के माध्यम से नियमित तौर पर पर्याप्त मात्रा में निर्धारित गुणवत्ता वाला पेयजल उपलब्ध हो। करार के जरिए ग्रामीण पेयजल आपूर्ति प्रणालियों के संवहनीय संचालन और रखरखाव के लिए ढांचागत सुधार लागू किए जाएंगे। इससे ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार आएगा और विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप दीर्घकालिक जल सुरक्षा हासिल करने में सहायता मिलेगी।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की आभासी उपस्थिति में इस करार पर हस्ताक्षर किए गए। पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) के कार्यालय में करार पर हस्ताक्षर के दौरान केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री वी सोमन्ना भी मौजूद थे।

इस अवसर पर पेयजल और स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक केके मीणा तथा अतिरिक्त सचिव और राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अभियान निदेशक कमल किशोर सोआन समेत डीडीडब्ल्यूएस के अनेक वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मिजोरम के साथ इस समझौता ज्ञापन पर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए, वह राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस समझौता ज्ञापन पर स्वाति मीणा नायक, संयुक्त सचिव (जल), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और मिजोरम सरकार में पीएचइडी सचिव एवं जल जीवन मिशन की प्रबंध निदेशक जोडिंगपुई ने हस्ताक्षर किए और दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।

केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश के बीच सहयोग के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की उपस्थिति में लद्दाख के साथ समझौता ज्ञापन पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश की सचिव शशांका अला (आईएएस), जन स्वास्थ्य यांत्रिकी/सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण (पीएचई/आईएंडएफसी) विभाग के अतिरिक्त सचिव डॉ. मोहम्मद उस्मान खान (जेकेएएस) और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

इस समझौता ज्ञापन पर स्वाति मीणा नायक, संयुक्त सचिव (जल), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और शूरबीर सिंह (आईएएस), आयुक्त/सचिव, जन स्वास्थ्य यांत्रिकी/सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण (पीएचई/आई&एफसी) विभाग, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख ने हस्ताक्षर किए और दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया।

सभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने इस बात पर जोर दिया कि ये सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन 2028 तक सभी ग्रामीण परिवारों के लिए ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने जल जीवन मिशन के तहत मिजोरम की लगभग शत प्रतिशत प्रगति की सराहना की और ‘हर घर जल’ की वास्तविक स्थिति सुनिश्चित करने के लिए संचालन, रखरखाव और सामुदायिक भागीदारी में समय पर सुधार करने का आग्रह किया। मंत्री महोदय ने राज्य में कार्यान्वयन की गति को बनाए रखने के लिए त्वरित निधि जारी करने सहित पूर्ण केंद्रीय सहयोग का आश्वासन दिया।

लद्दाख को संबोधित करते हुए, सी. आर. पाटिल ने केंद्र शासित प्रदेश में 98.18 प्रतिशत एफएचटीसी (घरेलू नल कनेक्शन) सुनिश्चित करने के सराहनीय प्रयासों के लिए विनय कुमार सक्सेना को बधाई दी। उन्होंने जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों के अनुसार मिशन के तेजी से कार्यान्वयन का भी आग्रह किया, ताकि लद्दाख को सौ प्रतिशत ‘हर घर जल’ प्रमाणित केंद्र शासित प्रदेश बनाया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, जल जीवन मिशन 2.0 में जवाबदेही, पानी की गुणवत्ता और दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर दिया गया है। इसे पूरा करने के लिए, उन्होंने अधिकारियों से जिला जल और स्वच्छता मिशन (डीडब्ल्यूएसएम) की बैठकें समय पर आयोजित करने और समझौता ज्ञापन का पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने मिजोरम और लद्दाख दोनों से जल आपूर्ति प्रणालियों की दीर्घकालिक व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए मनरेगा जैसी योजनाओं के साथ अभिसरण के माध्यम से ‘जल संचय जन भागीदारी’ को प्राथमिकता देने का भी आग्रह किया।

सी. आर. पाटिल ने सूचित किया कि सितंबर 2025 में, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव ने केंद्र शासित प्रदेशों में संचालन और रखरखाव से संबंधित मुद्दों के संबंध में गृह मंत्रालय के सचिव को एक पत्र लिखा था। इस संबंध में, उन्होंने लद्दाख के उपराज्यपाल से गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करने और संचालन एवं रखरखाव की दिशा में कार्य करने का अनुरोध किया।

उन्होंने अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक (एएस एंड एमडी), राष्ट्रीय जल जीवन मिशन (एनजेजेएम) द्वारा दिए गए सुझावों का भी उल्लेख किया, जो सितंबर 2025 में लद्दाख की अपनी यात्रा के दौरान वहां के मुख्य सचिव के साथ चर्चा के बाद दिए गए थे और उन्होंने इस संबंध में उन सुझावों पर कार्रवाई करने को कहा।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने अपने संबोधन में इस समझौता ज्ञापन को राज्य के लिए एक बड़ा बदलाव लाने वाला बताया और जल जीवन मिशन के तहत मिजोरम के शानदार प्रदर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने सूचित किया कि राज्य में 1,33,060 ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) प्रदान किए जा चुके हैं, और स्वीकृत योजनाओं में 99% भौतिक प्रगति हासिल कर ली गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सभी ग्रामीण स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों को नल से जल की आपूर्ति के दायरे में लाया गया है।

मुख्यमंत्री ने पानी की गुणवत्ता पर राज्य के प्रयासों पर दिए जा रहे जोर को भी रेखांकित किया, जिसके तहत 28 जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें एनएबीएल मान्यता प्राप्त सुविधाएं भी शामिल हैं। उन्होंने सभी गांवों में ग्राम जल और स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी) के गठन और जल आपूर्ति प्रणालियों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जिला तकनीकी टीमों के निर्माण के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य ने एक व्यापक कार्यान्वयन और सुधार योजना (सीआईआरपी) तैयार की है और इसे जल जीवन मिशन-एकीकृत प्रबंधन सूचना प्रणाली (जेजेएम-आईएमआईएस) पर अपलोड किया जाएगा।

केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए, उन्होंने कार्यान्वयन की गति को बनाए रखने के लिए समय पर वित्तीय सहायता के महत्व पर ज़ोर दिया, और इस मिशन के सफल निष्पादन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने अपने संबोधन में, लद्दाख के दुर्गम भूभाग में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में ‘जल जीवन मिशन’ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर को एक ऐतिहासिक अवसर बताया।

उन्होंने बताया कि इस दिशा में काफी प्रगति हुई है और बड़ी संख्या में गांवों में काम पूरे हो चुके हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जल जीवन मिशन हर घर तक नल का पानी पहुँचाने के सपने को हकीकत में बदल रहा है। उन्होंने जल जीवन मिशन की एक अनोखी खासियत पर भी रोशनी डाली, जिसमें समुदाय के नेतृत्व में सत्यापन किया जाता है। इसके तहत, स्थानीय ग्रामीण ही पानी की आपूर्ति व्यवस्था के ठीक से काम करने और पानी की पहुँच को प्रमाणित करते हैं, जिससे ज़मीनी स्तर पर जवाबदेही और प्रभावशीलता सुनिश्चित होती है। मिशन के मुख्य बिंदुओं के अनुरूप, विनय कुमार सक्सेना ने विश्वास जताया कि सुधारों से जुड़ा यह ढाँचा इसके कार्यान्वयन को और मज़बूत करेगा। साथ ही, उन्होंने ‘जल जीवन मिशन’ के लक्ष्यों को हासिल करने में केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन की ओर से पूरे सहयोग का आश्वासन भी दिया।

अपने शुरुआती संबोधन में, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीणा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह समझौता ज्ञापन न केवल पाइपलाइनों की बुनियादी संरचना को खड़ा करने पर प्राथमिकता देता है, बल्कि ज़मीनी स्तर पर प्रबंधित होने वाली टिकाऊ सेवाओं को भी प्राथमिकता देता है। उन्होंने विकेंद्रीकरण और सामुदायिक स्वामित्व पर ज़ोर दिया, जिसके तहत ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों को गाँव के अंदर की जल आपूर्ति प्रणालियों का प्रबंधन और संचालन करने के लिए सशक्त बनाया गया है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के महत्व को बताते हुए, अशोक के.के. मीणा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह समझौता ज्ञापन, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के बीच एक साझा प्रतिबद्धता है, जो ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित, संरक्षित और संवहनीय पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन 2.0 के दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करती है। उन्होंने यह भी बताया कि यह कदम एक ऐसी पहल है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘हर घर जल’ के दृष्टिकोण को पूरा करने के अनुरूप है।

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