सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पर्वत श्रृंखला की परिभाषा और सीमांकन संबंधी केंद्र सरकार की रिपोर्ट की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद की महानिदेशक कंचन देवी करेंगी। समिति को इस वर्ष 31 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट ने कहा कि अरावली पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से संबंधित प्रमुख मुद्दों के समाधान के लिए निष्पक्ष और वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक है। इससे पहले, न्यायालय ने पिछले वर्ष अक्टूबर में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी थी और विशेषज्ञों द्वारा नए सिरे से समीक्षा करने का निर्देश दिया था।
समिति इस बात की जांच करेगी कि क्या अरावली पहाड़ियों की पहचान के लिए प्रस्तावित मानदंड पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र को काफी हद तक कम कर सकते हैं और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में खनन या अन्य गतिविधियों की अनुमति दे सकते हैं।
समिति रिपोर्ट में प्रयुक्त ऊंचाई मानदंडों के वैज्ञानिक आधार का भी आकलन करेगी और यह मूल्यांकन करेगी कि क्या अरावली पर्वत श्रृंखला की सुरक्षा के लिए मौजूदा नियामक तंत्र पर्याप्त हैं। समिति में वानिकी, भूविज्ञान, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के विशेषज्ञ शामिल हैं।
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