सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की गर्भावस्था चिकित्सकीय तरीके से समाप्त करने का आदेश दिया है। पीड़िता की गर्भावस्था लगभग 28वें सप्ताह में है। अदालत ने मुंबई के लोकमान्य तिलक अस्पताल के डीन को डॉक्टरों की एक टीम गठित करने को कहा है। इस पर आने वाले सभी खर्च और चिकित्सा आवश्यकताओं को राज्य सरकार वहन करेगी।
शीर्ष अदालत का आदेश चिकित्सकों द्वारा दी गई उस सिफारिश के बाद आया, जिसमें कहा गया था कि गर्भावस्था जारी रहने से नाबालिग का शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य प्रभावित होगा।
मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने गर्भवती नाबालिग के मामले की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की। दुष्कर्म पीड़िता की मां की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने पहले उसकी मेडिकल जांच का आदेश दिया था। मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एम.टी.पी.) अधिनियम के अनुसार, विवाहित महिलाओं, दुष्कर्म, विकलांग और नाबालिगों के लिए 24 सप्ताह तक गर्भपात की अनुमति है।
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