सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुफ्त योजनाओं की संस्कृति से देश के आर्थिक विकास में बाधा आ रही है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉय माल्या बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचौली की पीठ ने कहा कि देश के अधिकांश राज्य राजस्व घाटे में हैं, फिर भी विकास की अनदेखी करते हुए वे इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं। न्यायालय ने तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। याचिका में कहा गया है कि उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति पर ध्यान दिए बिना सभी को मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव किया गया था। पीठ ने कहा कि राज्यों को मुफ्त भोजन, साइकिल और बिजली देने के बजाय रोजगार सृजन पर काम करना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह से मुफ्त की योजनाएं शुरू करने से कोई कार्य करना नहीं चाहेगा।
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