सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य संविधान के तहत मौलिक अधिकार है। न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मासिक चक्र जीने के अधिकार और निजता के अधिकार का अंतरिक अंग है।
सर्वोच्च न्यायालय ने लड़कियों और महिलाओं की प्रतिष्ठा स्वास्थ्य और समानता सुनिश्चित करने के लिए राज्यों केंद्र शासित प्रदेशों और विद्यालयों को कई निर्देश दिए हैं। शीर्ष न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सभी स्कूलों में लड़कियों के लिए निशुल्क बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने एक याचिका पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया न्यायालय ने अधिकारियों को ही सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि प्रत्येक स्कूल में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय हो, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी और निजी सभी तरह की शिक्षण संस्थानों के लिए इस आदेश का पालन करना अनिवार्य हो।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत मंडपम, नई दिल्ली में सम्पन्न हो गया। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स…
अमरीका के सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ संबंधी फैसले के बाद, अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प…
समुद्री सम्मेलन का पांचवां संस्करण आज से गोवा में शुरू होगा, जिसमें हिंद महासागर के…
आईसीसी टी20 क्रिकेट विश्व कप में सुपर 8 चरण आज से शुरू हो रहा है।…
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प द्वारा नए वैश्विक…
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान गोवा, मेघालय, सिक्किम और उत्तराखंड राज्यों में…