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Swedish PM Ulf Kristersson and PM Modi exchanged special commemorative gifts, highlighting the legacy of Rabindranath Tagore.
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स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और प्रधानमंत्री मोदी ने रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को रेखांकित करते हुए विशेष स्मारक उपहारों का आदान-प्रदान किया

स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को रेखांकित करते हुए विशेष स्मारक उपहारों का आदान-प्रदान किया।

प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन द्वारा दिए गए उपहार में एक बॉक्स शामिल था, जिसमें गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा हस्तलिखित दो नीति-वचनों (एपिग्राम) की प्रतिकृतियां, एक संक्षिप्त व्याख्यात्मक लेख और वर्ष 1921 में उप्साला विश्वविद्यालय की यात्रा के दौरान ली गई गुरुदेव टैगोर की एक तस्वीर थी। हाल ही में स्वीडिश राष्ट्रीय अभिलेखागार में खोजे गए ये मूल दस्तावेज, गुरुदेव टैगोर द्वारा वर्ष 1921 और 1926 में अपनी स्वीडन यात्राओं के दौरान तैयार किए गए थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री क्रिस्टरसन को रवींद्रनाथ टैगोर की संकलित रचनाओं का एक संग्रह भेंट किया, साथ ही शांतिनिकेतन का विशेष रूप से हस्तनिर्मित एक बैग भी प्रदान किया, जिस पर वे रूपांकन (मोटिफ्स) अंकित हैं जिन्हें गुरुदेव ने स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए चुना था। यह बैग गुरुदेव टैगोर के उस दर्शन का प्रतीक है जिसके अनुसार कला को केवल गैलरियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे बौद्धिक और व्यावहारिकता के बीच के अंतर को समाप्त करते हुए दैनिक उपयोग की वस्तुओं में समाहित होना चाहिए।

हालाँकि गुरुदेव टैगोर वर्ष 1913 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने के लिए स्वीडन की यात्रा नहीं कर सके थे, लेकिन जब उन्होंने वर्ष 1921 में स्वीडन का दौरा किया, तब किंग गुस्ताव पंचम ने उनका स्वागत किया था। ये उपहार भारत और स्वीडन के बीच साझा सांस्कृतिक एवं बौद्धिक विरासत के प्रतीक हैं और रवींद्रनाथ टैगोर की चिरस्थायी विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उपहारों का यह आदान-प्रदान वर्ष 1926 में गुरुदेव की स्वीडन की ऐतिहासिक यात्रा के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हुआ है।

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