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TDB-DST ने लिथियम-आयन बैटरियों के सतत पुनर्चक्रण हेतु मिनीमाइन्स क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को सहायता प्रदान की

महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित टिकाऊ प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने और घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के भारत सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने “बेकार पड़ी लिथियम-आयन बैटरियों का सतत पुनर्चक्रण” नामक परियोजना के लिए मेसर्स मिनीमाइन्स क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को वित्तीय सहायता प्रदान की है।

इस परियोजना का उद्देश्य उपयोग के बाद बेकार हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और मैंगनीज जैसे बैटरी-ग्रेड लवणों को निकालने हेतु स्वदेशी, शून्य-निर्वहन वाली, बैटरी के टिकाऊ पुनर्चक्रण और महत्वपूर्ण खनिज के शोधन की प्रक्रिया का व्यावसायीकरण करना है। इस पहल से पुनर्चक्रण की उन्नत प्रौद्योगिकियों के जरिए मूल्यवान महत्वपूर्ण खनिजों को फिर से प्राप्त करने की भारत की क्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बदलाव की प्रक्रिया में सहायता मिलेगी।

मिनीमाइन्स क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, आर4 श्रेणी की पहली ऐसी पुनर्चक्रण करने वाली (रिसाइक्लर) कंपनी है जो उपयोग के बाद बेकार हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों के लिए विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (ईपीआर) सेवाएं सहित संपूर्ण समाधान प्रदान करती है। इस कंपनी ने हाइब्रिड हाइड्रोमेटलर्जीटीएम नामक एक विशेष प्रक्रिया विकसित की है, जो विभिन्न प्रकार के लिथियम-आयन बैटरियों के रसायन और आकार के अनुरूप है। इस कंपनी की ब्लैक मास रिकवरी और पोस्ट-प्रोसेसिंग तकनीक कम ऊर्जा खपत, न्यूनतम उत्सर्जन और उच्च पृथक्करण दक्षता सुनिश्चित करती है, जिससे 99 प्रतिशत तक की पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) दर हासिल होती है।

पूर्व-मूल्यांकन, संग्रहण तथा पृथक्करण से लेकर यांत्रिक प्रसंस्करण एवं निष्कर्षण, चयनात्मक पृथक्करण और खनिज संवर्धन (बेनेफिशिएशन) जैसे प्रसंस्करण के बाद वाले उन्नत चरणों तक की संपूर्ण प्रक्रिया स्वदेशी रूप से विकसित और पेटेंट कराई गई है। यह दृष्टिकोण आयातित पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों, उपकरणों और महत्वपूर्ण कच्चे माल पर निर्भरता को काफी हद तक कम करने के साथ-साथ देश के भीतर शहरी खनन की अवधारणा को बढ़ावा देता है।

इस परियोजना के तहत, कंपनी अपने मौजूदा संचालन प्रक्रिया को एक पूर्णतः एकीकृत वाणिज्यिक संयंत्र के रूप में उन्नत करने का प्रस्ताव करती है, जो कई प्रकार की बैटरियों की रसायन प्रक्रियाओं को संसाधित करने और पुन: उपयोग के हेतु उच्च शुद्धता वाले महत्वपूर्ण पदार्थों का उत्पादन करने में सक्षम होगा। लिथियम कार्बोनेट और कोबाल्ट सल्फेट सहित पुनर्प्राप्त बैटरी-ग्रेड यौगिक संबंधित उद्योग के निर्धारित मानकों को पूरा करेंगे और घरेलू एवं निर्यात, दोनों प्रकार के बाजारों की जरूरतों को पूरा करेंगे।

इस अवसर पर बोलते हुए, टीडीबी के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उपयोग के बाद बेकार हो चुकी बैटरियों से महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति एवं शोधन हेतु स्वदेशी प्रौद्योगिकियों का विकास भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को मजबूत करने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस परियोजना के जरिए, टीडीबी पुनर्चक्रण के एक स्थायी समाधान के व्यावसायीकरण को सहायता प्रदान कर रहा है जो आयात पर निर्भरता को कम कर सकता है, चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकता है और राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के उद्देश्यों में योगदान दे सकता है।”

मिनीमाइन्स क्लीनटेक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के एक प्रतिनिधि ने सहायता के लिए टीडीबी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि इस सहायता से कंपनी को अपनी नवीन पुनर्चक्रण तकनीक को बड़े पैमाने पर विकसित करने और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ प्रक्रियाओं के जरिए बैटरी से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्रियों की पुनर्प्राप्ति में तेजी लाने में मदद मिलेगी।

यह परियोजना देश में महत्वपूर्ण खनिजों की पुनर्प्राप्ति और स्वच्छ ऊर्जा से संबंधित सामग्रियों के लिए आत्मनिर्भर और प्रौद्योगिकी-आधारित इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उपयोग के बाद बेकार हो चुकी बैटरियों से मूल्यवान धातुओं के कुशल निष्कर्षण को संभव बनाने वाली, यह पहल आत्मनिर्भर भारत, चक्रीय अर्थव्यवस्था को अपनाने और टिकाऊ ऊर्जा अवसंरचना के विकास की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

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