11वां रायसीना संवाद कल नई दिल्ली में संपन्न हो गया। तीन दिन के इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था। फिनलैंड के राष्ट्रपति आलेक्सांद्र स्तूब उद्घाटन-सत्र में मुख्य अतिथि थे। संवाद में इस वर्ष का विषय था : संस्कार- कथन, सामंजस्य, उन्नति।
चर्चा सत्रों में, दुनिया भर की हस्तियों ने छह विषयों पर अपने विचार रखे। इनमें- विवादित सीमाएँ: शक्ति, ध्रुवीकरण और परिधि, साझा संसाधनों का पुनर्निर्माण: नए समूह, नए संरक्षक, नए रास्ते तथा शुल्क के दौर में व्यापार: पुनर्प्राप्ति, सुगमता और पुनर्निर्माण शामिल थे।
कल इस संवाद के अंतिम दिन विदेशमंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कहा कि भारत का उत्थान दूसरों की गलतियों से नहीं, बल्कि इसकी अपनी शक्ति से निर्धारित होगा। संवाद में सेशेल्स, मॉरीशस और श्रीलंका के विदेश मंत्रियों तथा ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विदेश मंत्री ने हिंद महासागर का भविष्य विषय पर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर के देशों को भारत के विकास से लाभ होगा और भारत के साथ काम करने वाले देशों को और भी अधिक फायदा होगा। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने एक अन्य सत्र में कहा कि वैश्विक विकास वित्तपोषण नीति में सुधार की आवश्यकता है।
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