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केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के श्रम मंत्रियों और सचिवों के साथ दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आज संपन्न हुआ

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माननीय श्रम मंत्रियों और श्रम सचिवों के साथ दो दिवसीय कार्यशाला आज केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में संपन्न हुई। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की माननीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, विभिन्न राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के माननीय श्रम मंत्री, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव सुमिता डावरा और राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी कार्यशाला के दौरान उपस्थित थे। ये बैठकें पिछले वर्ष सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ आयोजित छः क्षेत्रीय कार्यशालाओं और कई अन्य परामर्शों के सफल परिणाम को दर्शाती हैं। कार्यवाही का लक्ष्य बनाकर तैयारी के उद्देश्य से, दो दिनों तक चले पांच सत्रों के दौरान दस से अधिक विषयों पर बड़े पैमाने पर चर्चा की गई और इनपुट एकत्र किए गए। पांच-पांच राज्यों की तीन समितियां गठित की गईं। कार्यशाला के दौरान हुई चर्चा के आधार पर, ये समितियां विचार-विमर्श करेंगी और श्रमिकों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवरेज के लिए एक संपोषित मॉडल तैयार करेंगी, जिसे मार्च 2025 में प्रस्तुत किया जाएगा।

दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान किए गए विचार-विमर्श और सुझावों को नोट करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन के दौरान सभी हितधारकों के लिए एक विस्तृत कार्य योजना बनाई। उन्होंने राज्यों से बीते दो दिनों के दौरान विभिन्न राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से प्रदर्शित सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की संभावना का आकलन करने का आग्रह किया। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि मंत्रालय संगठित और असंगठित श्रमिकों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न सुधारों और पहलों को तैयार करने के लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर प्रतिबद्ध है और काम करना जारी रखेगी। पेंशन, स्वास्थ्य देखभाल, जीवन और दुर्घटना बीमा आदि देने वाले संपूर्ण और संपोषित कल्याण कार्यक्रमों पर चर्चा की गई।

असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा, जैसे भवन और निर्माण कार्य, गिग और प्लेटफॉर्म इकोनॉमी और अन्य क्षेत्रों में बड़े स्तर पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने इन श्रमिकों के लिए स्थायी सामाजिक सुरक्षा मॉडल तैयार करने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, अनुबंध श्रम के कल्याण और निरीक्षक की भूमिका को निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता में बदलना, दूसरे दिन के लिए अन्य मुख्य एजेंडा आइटम थे।

राज्यों ने भवन और निर्माण श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा और कौशल विकास संस्थानों के विकास के अलावा, सामाजिक सुरक्षा कवरेज देने के लिए बीओसीडब्ल्यू उपकर निधि का इस्तेमाल से हुई प्रगति का प्रदर्शन किया। पेंशन जैसी विभिन्न सामाजिक कल्याण पहल देने के लिए इन संसाधनों का इस्तेमाल करने के नए तरीकों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई।

असंगठित श्रमिकों को ईश्रम पोर्टल पर शामिल करने में हुई तरक्की ने इन श्रमिकों को अंतिम बिंदु तक लाभ पहुंचाने को मजबूत करने की दिशा में सरकार के प्रयासों को प्रदर्शित किया है। ईश्रम पोर्टल पर अब तक 30 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक पंजीकृत हैं। मंत्रालय गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए एक समर्पित सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजना तैयार करने पर भी काम कर रहा है। योजना के वित्तपोषण, डेटा संग्रह और प्रशासन पर चर्चा की गई और राज्यों से आग्रह किया गया कि वे गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों पर ध्यान केंद्रित करने और मिशन मोड पर ईश्रम पर उनके पंजीकरण में सहायता के साथ असंगठित श्रमिकों के डेटा के साझा करने को प्राथमिकता दें। एनसीएस और एसआईडीएच जैसे सरकारी पोर्टलों और ईश्रम का एकीकरण रोजगार सृजन, रोजगार क्षमता, कौशल विकास आदि को प्रोत्साहन देने में योगदान दे रहा है।

राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासकों के साथ चर्चा कर निरीक्षक से निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता मॉडल में बदलाव एक और प्रमुख सुधार था। इस सुधार का प्रमुख उद्देश्य अनुपालन बोझ को कम करना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन देना है, साथ ही काम करने की अच्छी परिस्थितियों, काम करने के बराबर मौकों और बेहतर कर्मचारी-नियोक्ता संबंधों को सुनिश्चित करना है।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की माननीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने अपने समापन भाषण के दौरान 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने में भारत के कार्यबल की ओर से किए गए महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। संगठित और असंगठित श्रमिक, दोनों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवरेज को अधिकतम करना और श्रम कल्याण सुनिश्चित करना पिछले वर्ष आयोजित सभी विचार-विमर्शों और इस दो दिवसीय चिंतन शिविर का मुख्य लक्ष्य था। उन्होंने सभी पहलों को समयबद्ध तरीके से तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के जरूरी समग्र सरकारी दृष्टिकोण को दोहराया।

सहकारी संघीयता की भावना से जुड़ी, दो दिवसीय बैठकों ने श्रम कल्याण को प्रोत्साहन देने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की सुविधा प्रदान करने और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।

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