केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत को निर्यात बढ़ाते हुए अपनी अर्थव्यवस्था का विस्तार करना चाहिए और रोज़गार के अधिक अवसर पैदा करने चाहिए। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार और राज्यों के बीच मज़बूत सहयोग पर ज़ोर दिया। पीयूष गोयल की अध्यक्षता में पुनर्गठित व्यापार बोर्ड (बीओटी) की चौथी बैठक आज नई दिल्ली में हुई, जहाँ केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के मज़बूत प्रदर्शन पर प्रकाश डाला और निर्यात वृद्धि में तेज़ी लाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
पीयूष गोयल ने कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन में भूमि से घिरे राज्यों को निर्यात क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद करने के लिए लक्षित योजनाओं को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यों से मिले सुझावों के आधार पर, वाणिज्य मंत्रालय उभरती चुनौतियों के प्रभावी और समयबद्ध समाधानों की पहचान करने के लिए संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगा।
वस्तुओं की गुणवत्ता के महत्व पर ज़ोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एक विश्वसनीय निर्यातक के रूप में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा हर उत्पाद और खेप में उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने पर निर्भर करती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत करने और अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ लंबे वक्त तक विश्वास का रिश्ता कायम रखने के लिए बेहतर गुणवत्ता बनाए रखना बेहद ज़रुरी है।
पीयूष गोयल ने राज्यों से अपने सफल मॉडलों और सर्वोत्तम प्रथाओं को सक्रिय रूप से साझा करने का आग्रह किया, विशेष रूप से व्यापार सुगमता और एकल खिड़की निकासी प्रणाली जैसे क्षेत्रों में। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों से सीखने से, न केवल अन्य राज्यों को अपनी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भी पैदा होगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोगात्मक प्रयास अधिक कुशल शासन, निर्यातकों के लिए बेहतर सुविधा और देश भर में बेहतर नतीजे लाएंगे।
व्यापार बोर्ड, जिसका 2019 में व्यापार विकास एवं संवर्धन परिषद के व्यापार बोर्ड में विलय के ज़रिए पुनर्गठन किया गया था, भारत की व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने के मकसद से, विदेश व्यापार नीति से जुड़े नीतिगत उपायों पर शीर्ष सलाहकार निकाय के रूप में काम कर रहा है।
पीयूष गोयल ने बीओटी की पिछली बैठकों में घोषित पहलों पर हुई प्रगति का अवलोकन पेश किया। इनमें एक बड़ी उपलब्धि सितंबर 2024 में शुरू किए गए ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफ़ॉर्म का तेज़ी से विस्तार करना है, जो अब भारतीय मिशनों, वाणिज्य विभाग, डीजीएफटी, निर्यात संवर्धन परिषदों, एक्ज़िम बैंक और अन्य भागीदारों की सेवाओं को एकीकृत करता है। प्लेटफ़ॉर्म पर 62 लाख से ज़्यादा विज़िट, 18 लाख से ज़्यादा पंजीकृत उपयोगकर्ता, बहुभाषी पहुँच, मूल प्रमाणपत्रों का डिजिटल समेकन (22 लाख से ज़्यादा जारी), और बाज़ार की जानकारी और उत्पाद-अनुपालन उपकरणों के ज़रिए एमएसएमई को व्यापक समर्थन के साथ, यह प्लेटफ़ॉर्म निर्यातकों के लिए एक व्यापक डिजिटल गेटवे के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने जन सुनवाई वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग मॉड्यूल के मज़बूत प्रदर्शन पर भी प्रकाश डाला, जिसके तहत 3,518 शिकायतों में से 3,377 का समाधान किया गया है, 96% की निपटान दर हासिल की है और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी पात्र निर्यात श्रेणियों के लिए आरओडीटीईपी योजना का 31 मार्च 2026 तक विस्तार, निर्यातकों के लिए पूर्वानुमान प्रदान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की व्यापार कूटनीति ने तेज़ी से रफ्तार पकड़ी है, पिछले दो सालों में ऐतिहासिक एफटीए संपन्न हुए हैं, जिनमें भारत-ईएफटीए टीईपीए (मार्च 2024) और भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (जुलाई 2025) शामिल हैं। इसके अलावा कई अन्य प्रमुख भागीदारों के साथ बातचीत भी जारी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि हाल ही में लॉन्च किया गया निर्यात संवर्धन मिशन, क्षेत्र-विशिष्ट रणनीतियों और दीर्घकालिक निर्यात वृद्धि का समर्थन करने के लिए सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत को शामिल करते हुए एक समन्वित, प्रणाली-संचालित ढाँचा स्थापित करेगा।
इस दौरान राज्यों ने निर्यात संवर्धन और व्यापार सुगमता पर अपनी सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में जानकारी दी, जिससे आपसी सीख और सहयोग को बढ़ावा मिला। पीयूष गोयल ने दोहराया कि भारत की निर्यात रणनीति अब बाज़ार विविधीकरण, लॉजिस्टिक्स सुधारों, एमएसएमई सशक्तिकरण और प्रौद्योगिकी अपनाने पर केंद्रित है, जो वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकरण को गहरा करने और भारत को एक प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय व्यापारिक भागीदार के रूप में स्थापित करने के लिए बेहद ज़रुरी स्तंभ हैं।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने निर्यातकों और सरकारी सहायता प्रणालियों के बीच उत्कृष्ट संपर्क सेवाओं को मज़बूत करने की ज़रुरत पर बल दिया। उन्होंने व्यापार के लिए डिजिटल सार्वजनिक ढ़ांचे के विस्तार, व्यापार संबंधी मुद्दों के त्वरित समाधान और भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय में सुधार के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
डीजीएफटी और अतिरिक्त सचिव अजय भादू ने सभी व्यापार-सुविधा सेवाओं को पूरी तरह से डिजिटल और कागज़ रहित बनाने के निदेशालय के प्रयासों पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि डीजीएफटी की कई पहल, खासकर ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफ़ॉर्म और डिजिटल सर्टिफिकेट ऑफ़ ओरिजिन का मकसद एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाना, लेन-देन लागत कम करना और निर्यातकों को एफटीए और वैश्विक मांग विविधीकरण से उत्पन्न नए अवसरों का लाभ उठाने में मदद करना है।
इस बैठक में विभिन्न राज्य सरकारों के मंत्रियों, भारत सरकार और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संघों और बड़ी संख्या में निर्यातकों और व्यापार विशेषज्ञों ने सक्रिय रुप से भाग लिया। उनकी भागीदारी ने भारत के लिए एक मज़बूत, प्रौद्योगिकी-सक्षम और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी व्यापार व्यवस्था के निर्माण के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
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