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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली में समग्र शिक्षा 3.0 – ‘ नए सिरे से समग्र शिक्षा की परिकल्पना’ संबंधी बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज सुषमा स्वराज भवन, प्रवासी भारतीय केंद्र, नई दिल्ली में समग्र शिक्षा 3.0 पर हितधारकों के साथ ‘नए सिरे से समग्र शिक्षा की परिकल्पना’ शीर्षक संबंधी एक दिवसीय परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक का उद्देश्य राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों के साथ सहयोगात्मक विचार-विमर्श के माध्यम से समग्र शिक्षा 3.0 के लिए एक रणनीतिक, परामर्शपूर्ण और कार्यान्वयन योग्य रोडमैप विकसित करना था। चर्चा में उभरती चुनौतियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और योजना के अगले चरण में शासन, बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र अधिकारों को मजबूत करने के लिए आवश्यक प्राथमिकता वाले उपायों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इस बैठक में कौशल विकास एवं उद्यमिता और शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी; विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता सचिव संजय कुमार; उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी; मंत्रालय के अपर एवं संयुक्त सचिव; 11 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य शिक्षा सचिव और समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक (एसपीडी); विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधि तथा शिक्षा क्षेत्र के प्रख्यात विशेषज्ञ शामिल हुए।

इस अवसर पर अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2047 तक विकसित भारत का विजन सामने रखा है, जो तभी साकार हो सकता है जब भारत के प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो और देश में कक्षा बारहवीं तक शत-प्रतिशत नामांकन हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीखने संबंधी खाइयों को पाटना, स्कूल छोड़ने वालों की संख्या को कम करना, अधिगम एवं पोषण परिणामों में सुधार करना, शिक्षकों की क्षमता को मजबूत करना, महत्वपूर्ण कौशलों को बढ़ावा देना और ‘अमृत पीढ़ी’ को मैकाले की मानसिकता से आगे ले जाना- ये सभी सशक्त मानव पूंजी के निर्माण की साझा जिम्मेदारियां हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि मंच पर साझा किए सहयोगात्मक विचार-विमर्श और नवोन्मेषी सुझाव विद्यालयी शिक्षा इकोसिस्टम को मजबूत करने तथा समग्र शिक्षा की नए सिरे से परिकल्पना कर उसे परिणामोन्मुख, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी, भारतीयता में निहित और विद्यार्थियों की विविध आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में सहायक होंगे। उन्‍होंने जोर दिया कि विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी के सार्थक एकीकरण के माध्यम से ज्ञान तक पहुंचने का विस्‍तार करने के लिए विद्यालयों को एक बार फिर समाज के भरोसे सौंपना आवश्यक है।

समग्र शिक्षा के अगले चरण का जिक्र करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय विकास नीति 2020 के लागू होने के पांच साल बाद हम राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के अनुरूप शैक्षिक सुधार के एक नए चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए एक मजबूत और समग्र वार्षिक योजना तैयार करने और इसे एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने का आहवान किया, ये कहते हुए कि विचारों का समन्वय सामूहिक क्षमता को सुदृढ़ करेगा। धर्मेंद्र प्रधान ने शैक्षणिक विशेषज्ञों, क्षेत्रीय (सेक्टोरल) मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों और 11 भागीदार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी और बहुमूल्य सुझावों की भी सराहना की।

अपने संबोधन में जयंत चौधरी ने कहा कि योजनाएँ तभी सबसे अधिक सफल होती हैं, जब उन्हें विद्यालयों और राज्यों की वास्तविकताओं पर आधारित जमीनी स्तर के दृष्टिकोण से तैयार किया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि समग्र शिक्षा 3.0 इसी भावना को दर्शाती है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति की व्यापक और क्रियात्मक अभिव्यक्ति है, जहाँ विद्यालय बदलाव के कारक के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि बहुविषयक शिक्षा ढांचे में कौशल विकास, व्यावसायिक मार्ग, डिजिटल अधिगम और समावेशन को समाहित कर समग्र शिक्षा सुधार से आगे बढ़ते हुए विद्यार्थियों को कार्य, जीवन और तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करती है।

इस अवसर पर विद्यालयी शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अपर सचिव धीरज साहू द्वारा एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें समग्र शिक्षा और एनईपी नई नीति 2020 के अंतर्गत हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया, साथ ही आगामी वर्षों के लिए एक रूपरेखा और महत्वपूर्ण लक्ष्य निर्धारित किए गए। प्रमुख फोकस क्षेत्रों में पहुंच, समानता, गुणवत्ता, शिक्षक क्षमता निर्माण, डिजिटल शिक्षा और परिणाम-आधारित अधिगम आदि शामिल है।

समग्र शिक्षा विद्यालयी शिक्षा के लिए एक एकीकृत, केंद्र प्रायोजित योजना है, जो विद्यालयी शिक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाकर एक आदर्श बदलाव को चिन्हित करती है और जिसमें प्री-प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्तर तक के पूरे शैक्षिक क्रम को बिना किसी खंडन के शामिल किया जाता है।

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