केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने युवा नेतृत्व वाले क्षय रोग उन्मूलन प्रयासों को गति देने के लिए जोश टीमों का शुभारंभ किया
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में क्षय रोग मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जोश (संयुक्त स्वास्थ्य दल) टीमों का शुभारंभ किया। यह पहल क्षय रोग उन्मूलन के भारत के प्रयासों में युवाओं की अग्रणी सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस पहल का उद्देश्य युवाओं की ऊर्जा, पहुंच और प्रतिबद्धता का उपयोग करते हुए क्षय रोग की रोकथाम, शीघ्र निदान, समय पर उपचार और इससे जुड़े कलंक को कम करने का संदेश देश भर के समुदायों तक पहुंचाना है।
सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जोश टीमों के शुभारंभ को भारत में तपेदिक के खिलाफ सामूहिक लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि क्षय रोग मुक्त भारत की दिशा में देश के प्रयास एक पारंपरिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से जन आंदोलन में परिवर्तित हो गए हैं, जिसमें जन भागीदारी और सामुदायिक सहभागिता राष्ट्रीय प्रतिक्रिया के मुख्य स्तंभ के रूप में उभरे हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि क्षय रोग उन्मूलन का लक्ष्य केवल सरकारी हस्तक्षेप से प्राप्त नहीं किया जा सकता है और इसके लिए समुदायों, नागरिकों, निर्वाचित प्रतिनिधियों, अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं और विशेष रूप से देश के युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
युवा नेतृत्व वाली कार्रवाई के महत्व का उल्लेख करते हुए जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, प्रतिबद्धता और व्यापक पहुंच क्षय रोग उन्मूलन अभियान को नई गति प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि यद्यपि मंत्रालय ने इस अभियान में निर्वाचित प्रतिनिधियों और सामुदायिक नेतृत्व को धीरे-धीरे शामिल किया है, लेकिन चुनौती की व्यापकता और जटिलता को देखते हुए समुदायों के साथ सीधे काम करने वाले प्रतिबद्ध स्वयंसेवकों के एक व्यापक नेटवर्क की आवश्यकता है। इस संदर्भ में, उन्होंने युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय के सहयोग की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप जोश पहल जमीनी स्तर तक पहुंची है।
इसके अलावा, जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि जोश टीमें सरकार, समुदायों और नागरिकों को समन्वित और सतत तरीके से एक साथ लाने का प्रयास हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस पहल का उद्देश्य केवल सूचना का प्रसार करना नहीं है, बल्कि समुदायों के भीतर सार्थक संवाद स्थापित करना, विश्वास बढ़ाना, आशंकाओं को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि लोग समय पर जांच और उपचार के लिए आगे आएं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारत की क्षय रोग उन्मूलन रणनीति में जागरूकता और स्क्रीनिंग से आगे बढ़कर संपूर्ण उपचार प्रक्रिया को शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जागरूकता और स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण हैं लेकिन हमारी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती। हमें निदान, उपचार और उपचार की पूर्णता सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने सक्रिय केस फाइंडिंग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि क्षय रोग से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान शीघ्र की जा सके और उन्हें उचित उपचार से जोड़ा जा सके। उन्होंने कहा कि शीघ्र निदान आगे संक्रमण को रोकने और परिवारों और समुदायों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सक्रिय रूप से क्षय रोग के मामलों की पहचान करने के महत्व पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि ऐसे लोग भी हो सकते हैं जो क्षय रोग से पीड़ित हों लेकिन उन्हें अपनी स्थिति का पता न हो और परिणामस्वरूप वे औपचारिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से बाहर रह सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों की जल्द से जल्द पहचान करना न केवल समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि परिवारों और समुदायों में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने जोश टीमों से कमजोर आबादी की पहचान करने, सामुदायिक स्तर पर जागरूकता फैलाने और लक्षणों या चिंताओं वाले लोगों को आगे आकर जांच कराने के लिए प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया।
भारत द्वारा क्षय रोग के खिलाफ लड़ाई में की गई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, जगत प्रकाश नड्डा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भारत में क्षय रोग के मामलों में 21 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि वैश्विक स्तर पर यह कमी 12 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि भारत में क्षय रोग उपचार कवरेज बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है, जो वैश्विक स्तर पर 78 प्रतिशत से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि क्षय रोग के मामलों में कमी लाने और उपचार तक पहुंच बढ़ाने, दोनों ही मामलों में भारत की प्रगति वैश्विक रुझान से आगे है, जो राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत किए गए निरंतर और गहन प्रयासों का परिणाम है। साथ ही, उन्होंने आगाह किया कि इन उपलब्धियों से आत्मसंतुष्टि नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन इस गति को बनाए रखना और प्रयासों को और तेज करना आवश्यक है ताकि क्षय रोग से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति का निदान हो, उसे समय पर उपचार मिले और उपचार के दौरान उसे पूरा सहयोग मिले, जिससे क्षय रोग मुक्त भारत की दिशा में देश के सामूहिक संकल्प को बल मिले।
इसके अलावा, उन्होंने देश में क्षय रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने में प्रौद्योगिकी और नवाचार की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत स्क्रीनिंग और निदान को समुदायों के करीब लाने और उन्हें तेज़ और अधिक सुलभ बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक उपयोग कर रहा है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों से लैस पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के उपयोग का उल्लेख किया, जो क्षय रोग के लक्षण दिखाने वाले व्यक्तियों की पहचान करने और यह निर्धारित करने में सहायक हैं कि आगे की जांच आवश्यक है या नहीं। उन्होंने क्षय रोग की समय पर पुष्टि और दवा प्रतिरोध की पहचान करने के लिए त्वरित आणविक निदान तकनीकों के उपयोग पर भी प्रकाश डाला, जिससे रोगियों को अनावश्यक देरी के बिना उचित उपचार मार्ग पर लाया जा सके।
जगत प्रकाश नड्डा ने स्वयंसेवकों से समुदायों के भीतर सार्थक संवाद स्थापित करने का आह्वान करते हुए, जोश टीमों से लोगों की बात सुनने, उनकी चिंताओं को दूर करने और क्षय रोग से जुड़े भय और कलंक को मिटाने में सहायता करने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि क्षय रोग की रोकथाम और इलाज संभव है और इस बीमारी से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को भेदभाव या सामाजिक अलगाव का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों से स्वच्छता, स्वस्थ जीवनशैली और तंबाकू एवं नशीले पदार्थों के सेवन के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता सहित स्वस्थ व्यवहारों को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया।
जगत प्रकाश नड्डा ने इस बात पर बल देते हुए कहा कि निदान तो उपचार की शुरुआत मात्र है, और क्षय रोग से पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति को उचित उपचार से जोड़ा जाना चाहिए और ठीक होने तक उसे सहायता प्रदान की जानी चाहिए। उन्होंने दवाओं, पोषण संबंधी सहायता और उपचार के प्रति नियमित पालन के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि भारत ने उपचार के विकल्पों को भी मजबूत किया है, जिसमें दवा प्रतिरोधी क्षय रोग के लिए कम अवधि के उपचार भी शामिल हैं।
जोश टीमों के शुभारंभ के बारे में बात करते हुए जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि यह पहल पहले चरण में 11 राज्यों में शुरू की जा रही है और धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर इसका विस्तार होगा। ये टीमें जिला और ब्लॉक स्तर पर काम करेंगी और निगरानी एवं कार्यान्वयन के लिए डिजिटल तंत्रों द्वारा समर्थित होंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं के नेतृत्व वाली यह पहल कमियों को पहचानने, पहुंच को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने में सहायक होगी कि क्षय रोग से संबंधित सेवाएं उन लोगों तक भी पहुंचें जो औपचारिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से बाहर हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 2026 में क्षय रोग मुक्त घोषित किए गए 697 जिलों के 67,933 पंचायतों को भी बधाई दी और इस उपलब्धि को सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व की शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन एजेंडा को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के लिए निर्वाचित प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कर्मियों, स्वयंसेवकों और समुदाय के सदस्यों की सराहना की।
भारत को अपने लक्ष्य के करीब देखते हुए जगत प्रकाश नड्डा ने देश को अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए दृढ़ और निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने एनसीसी कैडेट्स और एमवाई भारत स्वयंसेवकों से क्षय रोग मुक्त भारत आंदोलन के राजदूत बनने का आह्वान करते हुए, रोकथाम, शीघ्र परीक्षण, समय पर उपचार और कलंक मिटाने का संदेश हर घर और समुदाय तक पहुंचाने का आग्रह किया।
अपने संबोधन के समापन में, जगत प्रकाश नड्डा ने सभी हितधारकों से क्षय रोग मुक्त भारत की दिशा में दृढ़ संकल्प, करुणा और साझा जिम्मेदारी की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने जोश टीमों के शुभारंभ पर उन्हें बधाई दी और प्रत्येक स्वयंसेवक, स्वास्थ्यकर्मी, समुदाय सदस्य और हितधारक से क्षय रोग मुक्त भारत की दिशा में अंतिम प्रयास में योगदान देने का आग्रह किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि “स्वस्थ नागरिक, स्वस्थ समाज, स्वस्थ देश” का सपना तभी साकार हो सकता है जब नागरिक एक स्वस्थ समाज के निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान दें। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियानों में लोगों की भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समुदायों को जागरूकता फैलाने, जरूरतमंदों की सहायता करने और लोगों को समय पर उपचार कराने के लिए प्रेरित करने हेतु निरंतर प्रोत्साहन दिया है।
उन्होंने क्षय रोग मुक्त भारत की परिकल्पना को साकार रूप देने और जोश टीम्स पहल के माध्यम से विभिन्न युवा नेटवर्कों को एक साथ लाने में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के प्रयासों को भी सराहा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के वर्ष 2030 तक क्षय रोग उन्मूलन के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत इस उद्देश्य की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है और वैश्विक समयसीमा से पहले इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत, विश्व के सबसे युवा प्रमुख देशों में से एक होने के नाते, अपने युवाओं की अपार क्षमता को पहचानता है और उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए सही मार्गदर्शन, सलाह और अवसर प्रदान करने के महत्व को समझता है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘माई भारत’ को राष्ट्र निर्माण गतिविधियों में युवाओं का मार्गदर्शन करने, उन्हें शामिल करने और सशक्त बनाने के लिए एक मंच के रूप में उपलब्ध कराया है। उन्होंने बताया कि लाखों एनसीसी कैडेट और एनएसएस स्वयंसेवकों को राष्ट्र की सेवा करने और सामाजिक कार्यों में योगदान देने के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जेपी नड्डा के समर्थन और नेतृत्व में इन युवा स्वयंसेवकों को राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम से जोड़ना ही ‘जोश टीम’ पहल को संभव बना पाया है।
जमीनी स्तर पर जोश टीमों की क्षमता पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. मंडाविया ने कहा कि स्वयंसेवक क्षय रोग से पीड़ित लोगों की पहचान करने, रोकथाम और पोषण के बारे में जागरूकता पैदा करने, रोगियों को उपचार और दवा का पालन करने के लिए परामर्श देने और इस बीमारी से जुड़े कलंक को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
डॉ. मांडविया ने विश्वास व्यक्त किया कि सभी स्तरों पर निरंतर प्रयासों से भारत वर्ष 2030 से पहले क्षय रोग-मुक्त होने की अपनी आकांक्षा को साकार करेगा और दुनिया को तपेदिक के खिलाफ युवा नेतृत्व वाले आंदोलन की शक्ति का प्रदर्शन करेगा।
जोश (संयुक्त स्वास्थ्य दल) टीमों के राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ का स्वागत करते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल भारत में क्षय रोग उन्मूलन के प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसके अंतर्गत अभियान को सीधे समुदायों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने इस उद्देश्य के लिए युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय को एक साथ लाने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सराहना की और कहा कि इन मंत्रालयों की संयुक्त शक्तियों से क्षय रोग उन्मूलन अभियान की पहुंच में उल्लेखनीय विस्तार हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि युवाओं की ऊर्जा, समर्पण और व्यापक पहुंच क्षय रोग के खिलाफ लड़ाई में जोश टीमों को एक शक्तिशाली ताकत बना सकती है। उन्होंने कहा कि युवा स्वयंसेवक समुदायों में रोकथाम, शीघ्र निदान और उपचार के बारे में जागरूकता फैलाने में सहायता कर सकते हैं और लोगों को समय पर उपचार कराने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, साथ ही इस बीमारी से जुड़े कलंक को दूर करने में भी योगदान दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जोश टीमें क्षय रोग के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत युवा नेतृत्व वाली ताकत के रूप में उभरेंगी और देश भर के समुदायों तक रोकथाम, शीघ्र पता लगाने और उपचार का संदेश पहुंचाने में सहायता करेंगी।
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि क्षय रोग के खिलाफ लड़ाई हर गांव, बस्ती और घर तक पहुंचनी चाहिए, विशेषकर उन जगहों तक जहां डर और सामाजिक कलंक के कारण लोग समय पर इलाज कराने से कतराते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि क्षय रोग से बचाव संभव है और इसका इलाज भी संभव है। उन्होंने जोश टीमों से आग्रह किया कि वे समुदायों में विश्वास जगाएं, लोगों को जांच के लिए आगे आने को प्रोत्साहित करें और मरीजों को अपना इलाज पूरा करने में सहयोग दें। उन्होंने कहा कि किसी को भी अपने लक्षणों को छिपाना नहीं चाहिए और न ही अकेले इस बीमारी से लड़ना चाहिए।
संजय सेठ ने कहा कि एनसीसी कैडेट्स और माई भारत स्वयंसेवकों की ऊर्जा, समर्पण और व्यापक पहुंच क्षय रोग उन्मूलन अभियान को नई गति प्रदान कर सकती है। उन्होंने युवाओं से सेवा, साहस और दृढ़ संकल्प की भावना को अपनाने का आह्वान करते हुए जागरूकता फैलाने, जांच को प्रोत्साहित करने, स्वस्थ आदतों को बढ़ावा देने और रोगियों और उनके परिवारों के साथ खड़े रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जब युवा क्षय रोग की रोकथाम और उपचार का संदेश समुदायों तक पहुंचाएंगे, तभी यह अभियान सही मायने में जन आंदोलन बन सकता है।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह भावना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत और क्षय रोग मुक्त भारत के दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
इस कार्यक्रम में सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने और क्षय रोग से प्रभावित व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए कई नई डिजिटल और आईईसी पहलों का शुभारंभ भी हुआ। टीमों द्वारा जागरूकता और पहुंच गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जोश फ्लिपबुक और जोश ब्रोशर का विमोचन किया गया।
खुशी अवतार, ई-संगिनी की एक पहल है, जिसे क्षय रोग के लक्षणों और उपचार विकल्पों के बारे में जानकारी प्रदान करने, क्षय रोग से संबंधित सामान्य शंकाओं और प्रश्नों का समाधान करने और रोगियों को समय पर दवा लेने की याद दिलाने के लिए शुरू किया गया है। यह सेवा 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे जानकारी का व्यापक और अधिक सुलभ प्रसार संभव हो पाता है।
इस कार्यक्रम के दौरान क्षय रोग मुक्त भारत ऐप पर एक समर्पित जोश टीम फीचर भी लॉन्च किया गया, ताकि युवा नेतृत्व वाली टीमों की गतिविधियों को और अधिक समर्थन और सुविधा प्रदान की जा सके।
राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए इस कार्यक्रम में देश भर के सभी 804 जिलों ने वर्चुअल रूप से भाग लिया, जो इस पहल की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। पहले चरण में, 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 55 जिलों में जोश टीमें तैनात की गई हैं। शेष जिलों में जोश टीमों का प्रशिक्षण और सक्रियता कार्यक्रम चलाया जाएगा, जिससे देश भर में इस पहल के विस्तार का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस कार्यक्रम में जिला स्तरीय क्षय रोग मुक्त पंचायतों को भी सम्मानित किया गया, जिसमें वर्ष 2026 में क्षय रोग मुक्त घोषित की गई 697 जिलों की 67,933 पंचायतों को मान्यता दी गई। यह उपलब्धि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं, समुदाय के सदस्यों और स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों को दर्शाती है, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर क्षय रोग के बारे में जागरूकता, रोकथाम, निदान और उपचार को मजबूत करने में योगदान दिया है।
जोश पहल के बारे में
जोश पहल को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय के सहयोग से कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें दिल्ली सरकार की भागीदारी भी शामिल है। यह पहल क्षय रोग उन्मूलन के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें सरकार की संस्थागत शक्ति, युवा नेटवर्क की पहुंच और समुदायों की भागीदारी को एक साथ लाकर जमीनी स्तर पर क्षय रोग के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत किया जाता है।
प्रत्येक जोश टीम में पांच माई भारत स्वयंसेवक और पांच एनसीसी कैडेट शामिल होते हैं और इसका नेतृत्व ब्लॉक/वार्ड स्तर पर नामित प्रथम श्रेणी अधिकारी द्वारा किया जाता है। इन टीमों का उद्देश्य क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण सामुदायिक स्तर के संपर्क सूत्र के रूप में कार्य करना है, जो क्षय रोग के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने, शीघ्र निदान और उपचार को बढ़ावा देने, भ्रांतियों और गलत धारणाओं को दूर करने और समुदाय की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए नियमित रूप से जनसंपर्क और जमीनी स्तर की गतिविधियां संचालित करती हैं।
घरेलू और सामुदायिक संपर्कों के माध्यम से, टीमें क्षय रोग के सामान्य लक्षणों, निवारक उपायों, शीघ्र निदान के लाभों और निर्धारित उपचार को पूरा करने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेंगी। वे क्षय रोग से जुड़े कलंक और भेदभाव का मुकाबला करने और इस बीमारी से प्रभावित लोगों को देखभाल प्राप्त करने और उपचार प्रणाली से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु परिवारों और समुदायों के साथ भी जुड़ेंगी।
जोश टीमों का शुभारंभ सामूहिक कार्रवाई की इसी भावना को बल देता है, जिसके तहत युवाओं को क्षय रोग मुक्त भारत अभियान में सक्रिय भागीदार बनने के लिए एक समर्पित मंच प्रदान किया गया है। सरकारी अधिकारियों, माय भारत स्वयंसेवकों, एनसीसी कैडेटों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, पंचायती राज संस्थाओं और समुदायों की संयुक्त भागीदारी के माध्यम से, यह पहल जन भागीदारी को गहरा करने और क्षय रोग के अंतिम छोर तक पहुंचने की प्रक्रिया को मजबूत करने का प्रयास करती है, जिससे एक स्वस्थ और क्षय रोग मुक्त भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प की पुष्टि होती है।
इस कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह; लोकसभा सांसद मनोज तिवारी, हर्ष मल्होत्रा, योगेंद्र चंदोलिया और रामवीर सिंह बिधूड़ी; राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव; राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनएचएम) की अपर सचिव एवं मिशन निदेशक आराधना पटनायक और दिल्ली सरकार, एमवाई भारत और राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।





