केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कार्य योजना 2025-29 के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. ए.के. सूद, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल और स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक (डीजीएचएस) डॉ. सुनीता शर्मा भी उपस्थित थीं।
जेपी नड्डा ने कहा कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध (एएमआर) जन स्वास्थ्य से जुड़ी प्रमुख समस्या है जिसका समाधान सामूहिक कार्रवाई से ही संभव है। उन्होंने कहा कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध की यह यात्रा वर्ष 2010 में प्रारंभिक चर्चाओं के साथ शुरू हुई थी, जिसके बाद वर्ष 2017 में रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर पहली राष्ट्रीय कार्य योजना की शुरूआत की गई।
जेपी नड्डा ने एएमआर से जुड़ी चुनौतियों की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एएमआर शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं, कैंसर के इलाज और अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर जोखिम पैदा करता है, उन्होंने आगे कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग से सुधारात्मक उपायों की तत्काल आवश्यकता को बल मिला है। इस संबंध में विभिन्न मंत्रालयों की ओर से कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं।
जेपी नड्डा ने कहा कि एनएपी-एएमआर 2.0, एएमआर से संबंधित प्रयासों में स्वामित्व बढ़ाकर, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय को मज़बूत करके और निजी क्षेत्र के साथ मज़बूत जुड़ाव सुनिश्चित करके, पहले एनएपी-एएमआर की कमियों को दूर करता है। एनएपी एएमआर 2.0 के तहत लागू की जाने वाली एएमआर नियंत्रण की प्रमुख रणनीतियों पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने जागरूकता, शिक्षा और प्रशिक्षण बढ़ाने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने प्रयोगशाला क्षमता बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में संक्रमण नियंत्रण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। श्री नड्डा ने चुनौतियों का तुरंत समाधान करने के लिए हितधारकों की नियमित बैठकों के महत्व पर भी ज़ोर दिया।
डॉ. ए.के. सूद ने कहा कि एनएपी-एएमआर 2.0 एक अधिक सुसंगत कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में एक समयोचित पहल है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के 18-24 नवंबर तक आयोजित विश्व एएमआर जागरूकता सप्ताह के पहले दिन जारी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत इस पहल को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने वाले अग्रणी देशों में से एक है, और एएमआर एक महामारी की तरह है जो एशिया और अफ्रीका सहित कई विकासशील देशों को प्रभावित कर रही है।
डॉ. सूद ने एएमआर के खतरे से निपटने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कुछ कदमों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केरल और गुजरात बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने वाले पहले राज्य हैं। कुछ रोगाणुरोधी दवाओं और कीटनाशकों के फसलों में इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने कहा, “भारत एएमआर इनोवेशन हब की स्थापना राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय हितधारकों को शामिल करते हुए एक नवीन प्रौद्योगिकी मंच बनाने के लिए की गई थी। इसने संसाधन जुटाने, नवाचार लाने और विभिन्न हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने में मदद की है।”
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