केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) और भारतीय राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) की गतिविधियों की व्यापक समीक्षा करने के लिए मुंबई में एनएफडीसी परिसर का दौरा किया।
अपनी यात्रा के दौरान मंत्री महोदय ने गुलशन महल की धरोहर इमारत सहित भारतीय सिनेमा के राष्ट्रीय संग्रहालय का भी दौरा किया। प्रदर्शनी में मूक युग से लेकर आज तक की भारतीय फिल्मों की समृद्ध और विविध विरासत को दर्शाया गया है, जो देश के सांस्कृतिक ताने-बाने में सिनेमा के अपार योगदान को उजागर करती है।
सीबीएफसी के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने प्रमाणन प्रक्रिया और समग्र रूप से फिल्म उद्योग में नवीनतम पहलों के बारे में मंत्री को जानकारी दी।
मंत्री ने समीक्षा के दौरान फिल्म क्षेत्र में रोजगार को कई गुना बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने ऐसी योजनाएं बनाने का आह्वान किया जो उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करें और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य भी हों। उन्होंने भारतीय सिनेमा की विरासत को बहाल करने और संरक्षित करने में अनुकरणीय कार्य के लिए एनएफडीसी-एनएफएआई (भारतीय राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार) की सराहना भी की।
उन्होंने देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अहम हिस्सा रही फिल्मों की सुरक्षा के प्रयासों को और मजबूत करने की मांग की, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आने वाली पीढ़ियां इस समृद्ध कलात्मक विरासत का आनंद ले सकें और उससे सीख सकें। उन्होंने एवीजीसी क्षेत्र में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना में किए जा रहे कार्यों को पूर्ण उद्योग की ओर ले जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अश्विनी वैष्णव ने एनीमेशन में राष्ट्रीय उत्कृष्टता केन्द्र की प्रगति की भी समीक्षा की, तथा भारतीय मनोरंजन उद्योग के भीतर बढ़ते क्षेत्रों के रूप में एनीमेशन और दृश्य प्रभावों के महत्व पर बल दिया।
इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की पश्चिमी क्षेत्र की महानिदेशक स्मिता वत्स शर्मा, एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक पृथुल कुमार, सीबीएफसी के सीईओ राजेंद्र सिंह तथा एनएफडीसी और सीबीएफसी के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
अपने दौरे के दौरान मंत्री ने एनएफडीसी परिसर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल के तहत एक पौधा भी लगाया।
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