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Union Minister Dr. Jitendra Singh addressed the 9th Convocation of the Academy of Scientific and Innovative Research (AcSIR)
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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी” (AcSIR) के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज यहां वैज्ञानिक एवं नवोन्मेषी अनुसंधान अकादमी (एसीएसआईआर) के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एसीएसआईआर का 2023 में शुरू किया गया “आई-पीएचडी” कार्यक्रम एक नई शैक्षणिक अवधारणा है जो कल्पना और नवाचार को उद्योग से जोड़ती है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एसीएसआईआर एक दशक से थोड़ा ही अधिक पुराना संस्थान है, फिर भी देश के सबसे परिवर्तनकारी वैज्ञानिक संस्थानों में से एक के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि अकादमी ने “अपनी उम्र से कहीं अधिक हासिल किया है।” इसने खुद को एक राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित किया है जो सीएसआईआर, आईसीएमआर, डीएसटी, आईसीएआर, एमओईएस और प्रमुख विश्वविद्यालयों से भारत की सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक प्रतिभाओं को एक साथ लाता है। और इसलिए, आई-पीएचडी में ‘आई’ न केवल उद्योग (इंडस्ट्री) के लिए, बल्कि कल्पना (इमैजिनेशन) और नवाचार (इनोवेशन) के लिए भी है।

प्रत्येक आई-पीएचडी विद्वान को बदलाव संबंधी अनुसंधान या स्टार्टअप्स के लिए प्रासंगिक तकनीक विकसित करने की अनुमति दी जाती है, जिससे भारत का अनुसंधान प्रशिक्षण औद्योगिक आवश्यकताओं के प्रति सीधे उत्तरदायी हो सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एसीएसआईआर अपने आप में “संपूर्ण” है, जो विज्ञान, शिक्षा, शासन और राष्ट्रीय आकांक्षा का एक सम्मिलन है, जो विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि एसीएसआईआर का तेजी से उदय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और नवाचार की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाता है, जहां वैज्ञानिक सोच भारत के आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी मिशनों और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए केंद्रीय बन गई है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एसीएसआईआर आज लगभग 7,000 छात्रों को सुविधा प्रदान करता है, जिन्हें 79 परिसरों में 3,100 से अधिक अग्रणी वैज्ञानिकों से सलाह मिलती है जो इसे सबसे अधिक विविध और बहुविषयक शोध संस्थान बनाता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह संस्थान एक “साझा राष्ट्रीय विश्वविद्यालय” के रूप में विकसित हो गया है, जो देश भर के विभिन्न विषयों से विद्वानों और संकायों को आकर्षित कर रहा है, और अनुसंधान संवाद, ज्ञान आदान-प्रदान और सहयोगी खोज के लिए एक मंच के रूप में कार्य कर रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एसीएसआईआर की स्थापना एक साहसिक और अभिनव प्रयोग था, जो पारंपरिक शैक्षणिक सीमाओं से परे अनुसंधान के लिए एक संस्थागत मार्ग बनाने का प्रयास था। उन्होंने कहा, “कई लोग पहले इस विचार को नहीं समझ पाए होंगे, लेकिन परिसरों का तेजी से विकास और बढ़ती मांग से पता चलता है कि देश को ऐसे संस्थान की जरूरत थी।”

उन्होंने कहा कि एसीएसआईआर की सफलता केवल प्रशासनिक समर्थन में नहीं, बल्कि देश के युवाओं के उत्साह में निहित है, जो स्टार्टअप और आजीविका के लिए अनुसंधान और नवाचार को एक सार्थक और आकांक्षी करियर के रूप में चुन रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री श्री सिंह ने आगे कहा कि ऐसे कार्यक्रम शोधकर्ताओं को एक स्थायी भविष्य प्रदान करते हैं, जिससे वे उद्यमी, सलाहकार और प्रौद्योगिकी विकासकर्ता के रूप में समाज में योगदान दे सकते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जैसे-जैसे भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से अंततः दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर होगा, तो यह “पूरी तरह से नवाचार-संचालित, प्रौद्योगिकी-संचालित और उद्योग-संचालित” होगा। उन्होंने कहा कि एसीएसआईआर के विद्वानों को “इस उपलब्धि के पथप्रदर्शक” बनने का अवसर मिलेगा, जिससे गहन तकनीक, स्वास्थ्य अनुसंधान, सतत कृषि, जलवायु विज्ञान और अग्रणी प्रौद्योगिकियों में भारत के उत्थान को आकार मिलेगा।

एसीएसआईआर की उत्कृष्टता राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में इसकी तेज वृद्धि में परिलक्षित होती है, जिसमें एनआईआरएफ 2025 (शोध श्रेणी) में 9वां स्थान, सीडब्ल्यूयूआर 2025 में वैश्विक स्तर पर शीर्ष 3.5 प्रतिशत, नेचर इंडेक्स में 10वां स्थान और साइमागो 2025 में 9वां स्थान शामिल है। 25,000 से अधिक प्रकाशनों, असंख्य पेटेंटों और अकेले 2024 में प्रदान की गई 831 पीएचडी के साथ, एसीएसआईआर एसटीईएम में भारत का सबसे बड़ा डॉक्टरेट अनुसंधान संस्थान बन गया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, एसीएसआईआर आरएमआईटी विश्वविद्यालय, डीकिन विश्वविद्यालय, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय, तुर्कू विश्वविद्यालय (फिनलैंड), मेलबर्न विश्वविद्यालय, एआईएसटी (जापान) और अन्य के साथ सहयोग के माध्यम से अपना विस्तार कर रहा है, जिससे संयुक्त पर्यवेक्षण, दोहरी डिग्री के मार्ग और वैश्विक अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच आसान हो रही है।

केंद्रीय मंत्री ने एसीएसआईआर विज्ञान क्लब, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ट्रांसडिसिप्लिनरी लेक्चर सीरीज़ और वार्षिक पत्रिका ब्रावुरा जैसी पहलों के माध्यम से एक जीवंत बौद्धिक परितंत्र के निर्माण के लिए एसीएसआईआर की सराहना की, जो छात्र समुदाय की गतिशीलता और रचनात्मकता को दर्शाते हैं।

आरंभ में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कुलाधिपति प्रो. पी. बलराम; नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल; श्रीमती पीरामल; सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी; और सीएसआईआर-आईएमटेक के निदेशक डॉ. मनोज धर सहित विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रोफेसर धर को उनके गतिशील नेतृत्व और दूरदर्शिता, ऊर्जा और शैक्षणिक समावेशिता के साथ सबसे नए सीएसआईआर संस्थानों में से एक का संचालन करने के लिए बधाई दी।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि एसीएसआईआर भारत के वैज्ञानिक भविष्य के केंद्र में है। यह युवा, आकांक्षी, अनुसंधान-प्रधान और राष्ट्रीय मिशनों से जुड़ा है। उन्होंने स्नातक करने वाले छात्रों से आग्रह किया कि वे नवाचार की भावना को आगे बढ़ाएं तथा एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दें जो तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर, वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार हो।

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