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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक स्मारक डाक टिकट का अनावरण किया

डाक विभाग ने बॉम्बे जिमखाना की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है , जो खेल उत्कृष्टता की इसकी गौरवशाली विरासत और राष्ट्र के लिए इसके स्थायी सांस्कृतिक योगदान का जश्न मना रहा है।

इस स्मारक डाक टिकट को मुंबई के बॉम्बे जिमखाना में केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया द्वारा औपचारिक रूप से जारी किया गया । इस अवसर पर राज्यसभा सांसद मिलिंद देवरा , बॉम्बे जिमखाना के अध्यक्ष संजीव सरन मेहरा , नवी मुंबई क्षेत्र की पोस्टमास्टर जनरल सुचिता जोशी और अन्य विशिष्ट अतिथियों एवं बॉम्बे जिमखाना के सदस्यों की उपस्थिति रही।

इस अवसर पर ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आशा व्यक्त की कि यह स्मारक डाक टिकट हर व्यक्ति की हथेली में एक संदेशवाहक की तरह काम करेगा, जो एक लिफाफे से दूसरे लिफाफे और एक हाथ से दूसरे हाथ तक यात्रा करेगा। उन्होंने कहा कि खेल की ही तरह, यह डाक टिकट भी कहानियों और मूल्यों को समेटे हुए है, जो युवा लड़के-लड़कियों को खेल अपनाने, सक्रिय रहने और जीवन को सकारात्मक रूप से आकार देने में संस्थानों की शक्ति पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करता है।

ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इंडिया पोस्ट और बॉम्बे जिमखाना क्लब के बीच तुलना करते हुए कहा कि दोनों ही संस्थाएं भावनाओं को व्यक्त करने, लोगों को जोड़ने और पीढ़ियों के बीच सेतु बनाने पर आधारित हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदृष्टि और अटूट समर्थन से डाक विभाग में एक क्रांतिकारी बदलाव हो रहा है—अपनी पुरानी प्रणालियों को नया रूप दे रहा है, अपनी सेवाओं का विस्तार कर रहा है और अगले पांच वर्षों में विश्व का सबसे बड़ा और सबसे समावेशी लॉजिस्टिक्स संगठन बनने की दिशा में अग्रसर है।

सन् 1875 में स्थापित बॉम्बे जिमखाना भारत की खेल और सामाजिक विरासत का एक विशिष्ट स्तंभ रहा है, जिसने पीढ़ियों से खिलाड़ियों का पोषण किया है और साथ ही सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के लिए एक जीवंत केंद्र के रूप में कार्य किया है। 150 वर्ष के दौरान, इस संस्था ने खेल भावना, सौहार्द और सामुदायिक जुड़ाव की प्रबल भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह स्मारक डाक टिकट बॉम्बे जिमखाना के प्रतिष्ठित परिसर और मैदानों को खूबसूरती से दर्शाता है , जो इसकी चिरस्थायी विरासत और भारत के खेल परिदृश्य में इसके योगदान का प्रतीक है।

इस विशेष अंक के माध्यम से, डाक विभाग संस्था की 150 साल की यात्रा का सम्मान करता है और डाक टिकट संग्रह के माध्यम से भारत की समृद्ध खेल उपलब्धियों को संरक्षित करने और प्रदर्शित करने की अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

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