भारत

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कर्नाटक के भालकी में पूज्य डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी के 75वें वर्ष समारोह का उद्घाटन किया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को कर्नाटक के बीदर जिले के भालकी में श्री चन्नबासावाश्रम में हिरेमठ संस्थान के पूज्य डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी की 75वीं जयंती के अवसर पर अमृत महोत्सव समारोह का उद्घाटन किया।

उपराष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बीदर क्षेत्र में उपस्थित होने पर प्रसन्नता व्यक्त की, जो ज्ञान, सुधार और आध्यात्मिक चिंतन का एक ऐतिहासिक केंद्र है। उन्‍होंने बसवन्ना की विरासत का उल्लेख करते हुए समानता को बढ़ावा देने और सामाजिक भेदभाव का विरोध करने में उनके उल्‍लेखनीय प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व के पहले आध्यात्मिक मंच के रूप में माने जाने वाले ‘अनुभव मंडप’ के आदर्श पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

उपराष्ट्रपति ने पूज्य डॉ. बसवलिंग पट्टादेवरु महास्वामीजी के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें करुणा और सेवा का सच्चा प्रतीक बताया। उन्होंने 500 से अधिक अनाथ और परित्यक्त बच्चों को आश्रय, शिक्षा और सम्मान प्रदान करने तथा 20,000 से अधिक छात्रों को सेवा प्रदान करने वाले 60 से अधिक संस्थानों के विशाल शैक्षिक नेटवर्क के निर्माण में उनके प्रयासों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए “विकास भी, विरासत भी” के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत का विकास उसकी समृद्ध सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के साथ-साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत आज तकनीकी रूप से उन्नत, आर्थिक रूप से मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली देश के रूप में उभर रहा है, साथ ही अपनी सभ्यतागत परंपराओं में भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विरासत संरक्षण, पारंपरिक रीति-रिवाजों, योग और सांस्कृतिक धरोहर पर नए सिरे से जोर देने से नागरिकों में गर्व की भावना पैदा हुई है और सभ्यतागत आत्मविश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि ये प्रयास केवल इमारतों के संरक्षण तक सीमित नहीं हैं बल्कि आत्मविश्वास को बहाल करने और लोगों को भारत के कालजयी मूल्यों और परंपराओं से फिर से जोड़ने के बारे में भी हैं।

उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर महिला सशक्तिकरण के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र निर्माण का केंद्र है। उन्होंने कहा कि महिलाएं नेतृत्व की भूमिकाओं में सहानुभूति और करुणा लाती हैं और जब महिलाएं आगे बढ़ती हैं, तो परिवार समृद्ध होते हैं, समुदाय मजबूत होते हैं और राष्ट्र प्रगति करते हैं।

उपराष्ट्रपति ने लोगों से पूज्य स्वामीजी के जीवन और शिक्षाओं तथा बसवन्ना के दर्शन से प्रेरणा लेने और समानता, करुणा और धर्म पर आधारित समाज के निर्माण की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान, ‘कल्याण करुण्य’ (अभिनंदन ग्रंथ) नामक पुस्तक और ‘बसव किरण’ नामक एक फोटो एल्बम जारी किया गया। उपराष्ट्रपति ने चन्नाबसव पट्टादेवरु की समाधि का भी दौरा किया और प्रार्थना की।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्‍य लोगों में कर्नाटक के राज्यपाल थावर चंद गहलोत, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कर्नाटक सरकार में वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे, कर्नाटक सरकार में नगर प्रशासन मंत्री रहीम खान और कई अन्य आध्यात्मिक नेता, जन प्रतिनिधि और व्‍यक्ति शामिल थे।

Editor

Recent Posts

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कर्नाटक के कलबुर्गी में स्थित केंद्रीय कर्नाटक विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज कर्नाटक के कलबुर्गी में स्थित केंद्रीय कर्नाटक विश्वविद्यालय के 10वें…

1 घंटा ago

पश्चिम बंगाल में पहले चरण और तमिलनाडु में एक ही चरण में कल होने वाले विधानसभा चुनावों की सभी तैयारियां पूरी

पश्चिम बंगाल में पहले चरण और तमिलनाडु में एक ही चरण में कल होने वाले…

2 घंटे ago

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने शेखा झील पक्षी अभयारण्य को भारत का 99वां रामसर स्थल घोषित किया

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के…

4 घंटे ago

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन बर्लिन में भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जर्मनी की अपनी तीन दिवसीय यात्रा के पहले दिन बर्लिन…

4 घंटे ago

उत्तराखंड में केदारनाथ धाम आज से श्रद्धालुओं के लिए खुला

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ धाम के कपाट आज सुबह आठ बजे वैदिक…

10 घंटे ago