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उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज इटानगर में अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए विधायकों से लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखने और प्रदेश तथा राष्ट्र के विकास की दिशा में काम करने का आह्वान किया।

अरुणाचल प्रदेश विधानसभा परिसर में पहुंचने पर उपराष्ट्रपति ने महात्मा गांधी और बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। फिर उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश विधानसभा संग्रहालय का भी दौरा किया, जो राज्य विधानमंडल के विकास और प्रगति तथा उसके विधायी सफर को प्रदर्शित करता है।

अरूणाचल प्रदेश की विधानसभा को संबोधित करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश का अत्यधिक रणनीतिक महत्व है, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है और प्रचुर प्राकृतिक संसाधन हैं। यही नहीं, यह राष्ट्र की सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि शेष देश की सुरक्षा अरुणाचल प्रदेश के लोगों द्वारा सीमाओं की रक्षा से घनिष्ठता से जुड़ी हुई है।

भारत की विविधता में एकता पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश एक संविधान, ‘राष्ट्र प्रथम’ की एक दृष्टि और 2047 तक विकसित भारत के एक लक्ष्य से एकजुट है। राष्ट्रीय कवि सुब्रमण्यम भारती को उद्धृत करते हुए उन्होंने भारत की विविध भाषाओं और परंपराओं में निहित विचार की एकता पर प्रकाश डाला।

भारत की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत को याद करते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने भारत को ‘लोकतंत्र की जननी’ बताया और विधायकों से इस विरासत को कायम रखने का आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास पर बढ़ते ध्यान को रेखांकित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में स्थापित किए गए पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) मंत्रालय और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत इस क्षेत्र पर दिए गए जोर का उल्लेख किया। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश सरकार और वहां के निवासियों को प्रदेश की विकास उपलब्धियों के लिए बधाई दी, जिनमें देश में कीवी के अग्रणी उत्पादक के रूप में इस प्रदेश का उभरना, सड़क अवसंरचना का विस्तार, एक लाख से अधिक मृदा स्वास्थ्य कार्डों का जारी होना और शिक्षा एवं प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय प्रगति शामिल है।

अरूणाचल विधानसभा को स्वर्ण जयंती पूरी करने पर बधाई देते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने विधान सचिवालय को प्लास्टिक मुक्त बनाने और विधानसभा पुस्तकालय एवं संग्रहालय की स्थापना जैसी पहलों की सराहना की।

उपराष्ट्रपति ने विधायकों से चुनावी सफलता से ऊपर जनसेवा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चुनाव वोटों से जीते जा सकते हैं, लेकिन जनता का सम्मान और विश्वास केवल समर्पित सेवा से ही अर्जित किया जा सकता है। उन्होंने विधायकों से प्रश्नकाल और शून्यकाल का प्रभावी उपयोग करते हुए सार्वजनिक नीति और अपने निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित मुद्दों को उठाने का आह्वान किया।

राज्यसभा के पीठासीन अधिकारी के रूप में, सी.पी. राधाकृष्णन ने विधायी कार्यप्रणाली में संवाद, वाद-विवाद और चर्चा के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अपने इस संदेश को दोहराते हुए कहा कि “वाद-विवाद, चर्चा या यहां तक ​​कि व्यवधान भी हमेशा किसी निर्णय तक पहुंचना चाहिए।” उन्होंने कहा कि स्वस्थ वाद-विवाद लोकतंत्र को मजबूत करता है और रचनात्मक सहयोग प्रदेश और राष्ट्र की प्रगति में सहायक होता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित अरुणाचल प्रदेश के बिना विकसित भारत संभव नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकास समावेशी होना चाहिए और किसी भी आदिवासी या हाशिए पर रह रहे समुदाय को पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदारी से उपयोग के साथ-साथ पर्यावरणीय चिंताओं को संतुलित करने की जरूरत पर भी बल दिया। अरुणाचल प्रदेश की महत्वपूर्ण जलविद्युत क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इसका उचित उपयोग अधिक राजस्व उत्पन्न कर सकता है और राज्य के विकास को गति दे सकता है।

इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कैवल्य त्रिविक्रम परनाइक, अरुणाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष तेसम पोंगते, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उपमुख्यमंत्री चोवना मीन, विधानसभा सदस्य और राज्य सरकार तथा विधान सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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