उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज तिरुवरूर में केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की और स्नातक छात्रों को जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने पर बधाई दी।
सीपी राधाकृष्णन ने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का उत्सव नहीं है, बल्कि शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज और समर्पण, दृढ़ता और सुदृढ़शीलता का उत्सव है जिसने छात्रों को इस महत्वपूर्ण क्षण तक पहुंचाया है।
उन्होंने डिग्री हासिल करने वाले छात्रों के माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी और कहा कि उन्होंने अपने बच्चों व छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपने वर्तमान के कई सुख-सुविधाओं का त्याग किया है।
सीपी राधाकृष्णन ने तिरुवरूर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भव्य त्यागराज मंदिर वाला यह पवित्र नगर सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वत्ता और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है।
उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की पौराणिक त्रिमूर्ति को जन्म दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सच्ची महानता तभी उभरती है जब संस्कृति, ज्ञान और मूल्य एक साथ फलते-फूलते हैं।
उपराष्ट्रपति ने पिछले बारह वर्षों में उच्च शिक्षा के अभूतपूर्व विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देशभर में दीक्षांत समारोहों में वे अक्सर पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा डिग्री और पदक प्राप्त करते हुए देखते हैं जो कि स्वागत योग्य है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि आज शिक्षा का मूल्यांकन केवल परीक्षाओं या अंकों के आधार पर नहीं किया जा सकता है। इसका आकलन स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, सहयोगात्मक रूप से काम करने और जीवन भर सीखते रहने की क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षा पर बल देकर इस दृष्टिकोण को अपनाने के लिए तमिलनाडु के केंद्रीय विश्वविद्यालय की सराहना की।
संसद द्वारा हाल ही में पारित सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना और छात्रों के हितों की रक्षा करना सर्वोपरि महत्व रखता है।
झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान झारखंड सरकार द्वारा इसी तरह का एक विधेयक पारित किया गया था और तत्कालीन राज्यपाल के रूप में उन्होंने तुरंत इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दिया था।
उन्होंने कहा, कि अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज के बुरे तत्वों को दंडित किया जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और अखंडता की रक्षा के लिए कड़े उपायों की आवश्यकता पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से आग्रह किया कि वे ज्ञान के उपभोक्ता बनने के बजाय निर्माता बनें, नकल करने वालों के बजाय नवप्रवर्तक बनें और अनुयायियों के बजाय नेता बनें।
सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे “राष्ट्र प्रथम” की भावना को सर्वोपरि रखें और राष्ट्र के विकास के लिए अपने ज्ञान, कौशल व नेतृत्व का उपयोग करें।
उपराष्ट्रपति ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से मादक पदार्थों के तस्करों और मादक पदार्थों के खतरे को फैलाने में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग न केवल व्यक्तियों के जीवन को बर्बाद करता है बल्कि परिवारों और समाज को भी बुरी तरह प्रभावित करता है और युवाओं को इस खतरे से बचाना एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने छात्रों से “नशीली दवाओं को ना कहें” की अपनी अपील को दोहराया और उन्हें अपने दोस्तों को भी मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने के लिए प्रेरित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अपने संबोधन के समापन में, उपराष्ट्रपति ने प्रत्येक स्नातक को सफलता, पूर्णता, अच्छे स्वास्थ्य और समाज में सार्थक बदलाव लाने की कामना की।
दीक्षांत समारोह में कुल 1,103 स्नातकों को डिग्रियां मिली। इनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए प्रतिष्ठित 50 स्वर्ण पदक विजेता भी शामिल हैं। इन 1,103 स्नातकों में से 616 महिलाएं हैं। 50 में से 37 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले।
इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, लोकसभा सांसद (नागपट्टिनम) थिरु वी. सेल्वराज, कुलाधिपति प्रो. जी. पद्मनाभन, कुलपति वरिष्ठ प्रो. सुलोचना शेखर, संकाय सदस्य, अभिभावक और छात्र भी उपस्थित थे।
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