उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित ‘एमएसएमई दिवस 2026 – उद्यमी भारत’ कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे, खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज गोयल और मंत्रालय तथा इसके संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में नीति निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज, महिला उद्यमी, वित्तीय संस्थान, शिक्षाविद और एमएसएमई क्षेत्र के अन्य प्रमुख हितधारक भी शामिल हुए।
इस कार्यक्रम ने अधिक लचीले, प्रौद्योगिकी-आधारित, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार एमएसएमई प्रणाली तंत्र के निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान, उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) को अनुसूची ‘बी’ से अनुसूची ‘ए’ केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) में शामिल किए जाने पर बधाई दी। इस अवसर पर गुंटुकु कामेश्वर प्रसाद और पम्मिना सत्यनारायण ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन को जीआई-टैग प्राप्त पोंडुरु खादी का एक उत्कृष्ट नमूना भेंट किया जो आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के इस पारंपरिक वस्त्र की समृद्ध विरासत और असाधारण शिल्प कौशल को दर्शाता है। इस अवसर पर कॉयर बोर्ड द्वारा उपराष्ट्रपति का एक चित्र भी भेंट किया गया।
उपराष्ट्रपति ने भारत भर में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म, पोर्टल और प्रकाशनों का शुभारंभ किया। इनमें पीएमईजीपी 2.0 पोर्टल, समाधान 2.0 पोर्टल, पीएमएस पोर्टल, एमएसएमई ग्लोबल मार्ट 2.0 पोर्टल, एमएसएमई टेस्टिंग पोर्टल और एमएसएमई आइडिया हैकाथॉन 6.0 शामिल हैं।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना पर एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया जो योजना के तीन वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में है और कारीगरों की प्रेरणादायक सफलता की कहानियों के माध्यम से इसके परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती है। आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष पर भी एक पुस्तक का विमोचन किया गया जिसमें उद्यम विकास, रोजगार सृजन, नवाचार और महिला उद्यमिता में कोष के योगदान को दर्शाया गया है।
मंत्रालय ने एमएसएमई पोर्टलों पर बहुभाषी पहुंच की शुरुआत की है जिससे एमएसएमई वेबसाइटों और पोर्टलों पर बहुभाषी और आवाज द्वारा संचालित प्रणाली सक्षम हो गई है। इस पहल के तहत एमएसएमई सेवाओं तक सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में पहुंच प्रदान की जाती है और इसमें एआई द्वारा संचालित आवाज शिकायत निवारण और दस्तावेज़ अनुवाद सुविधाएं शामिल हैं जिससे पहुंच और डिजिटल समावेशन को बढ़ावा मिलता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा, “मैं लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र को आकार देने वाले उद्यमियों और सभी हितधारकों को अपनी शुभकामनाएं देता हूं। मैंने अपने करियर की शुरुआत एमएसएमई क्षेत्र से ही की थी।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने अपने पेशेवर सफर की शुरुआत कॉयर बोर्ड से की थी और वे स्वयं भी एक उद्यमी रह चुके हैं।
उन्होंने कहा, “अगर आप दृढ़ निश्चयी हैं तो कोई भी चीज आपको रोक नहीं सकती। आप निश्चित रूप से अपने लक्ष्य हासिल करेंगे। विश्व की हर अर्थव्यवस्था का विकास लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के योगदान से हुआ है। एमएसएमई दिवस के अवसर पर मैं एमएसएमई मंत्रालय, एनएसआईसी, केवीआईसी और एमएसएमई क्षेत्र में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को बधाई देता हूं।”
उपराष्ट्रपति ने खादी और ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा विकसित कई नवोन्मेषी और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों का भी शुभारंभ किया। इन उत्पादों में टुकुन (शिशु वस्त्र), रंगताल (टेबल रनर और मैट), बेला (शिशुओं के लिए रैप शीट), वन्या (एरी स्टोल) और उमंग (ऊनी स्टोल) शामिल थे।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा, “भारत सरकार एक ऐसा प्रणाली तंत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है जहां प्रत्येक उद्यमी को नवाचार करने, विकास करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का समान अवसर मिले।”
उन्होंने यह भी कहा, “हमारा ध्यान औपचारीकरण, डिजिटल सशक्तिकरण, वित्त तक आसान पहुंच, मजबूत बाजार संबंध, प्रौद्योगिकी अपनाने और नवाचार आधारित विकास पर केंद्रित है।” जीतन राम मांझी ने एमएसएमई दिवस पर बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।
एमएसएमई राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा, “एमएसएमई क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है और उद्यमी इस विकास के चालक हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “ एमएसएमई मंत्रालय डिजिटल सहायता, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी और विपणन संपर्क प्रदान कर रहा है। ”
उन्होंने कहा, “आप उद्यमी भारत के विकास में भागीदार हैं। लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र मात्र उद्यमों से कहीं अधिक है; ये साकार होते सपने हैं, उद्यमों में बदलते विचार हैं और जिंदगियों को बदलने वाली कड़ी मेहनत है।”
लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के सचिव भरत खेरा ने लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र का संक्षिप्त परिचय देते हुए भारत की आर्थिक वृद्धि में इसकी भूमिका का उल्लेख किया और लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही प्रमुख पहलों और योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में योगदान देने वाले सभी हितधारकों की सराहना की।
एमएसएमई दिवस समारोह का समापन “महिला उद्यमिता के एक नए युग की शुरुआत” और “चैंपियन एमएसएमई का निर्माण” विषयों पर दो तकनीकी पैनल चर्चाओं के साथ हुआ।
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