उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज गौहाटी विश्वविद्यालय में 110 करोड़ रुपए की लागत वाली अवसंरचना विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इसमें एक नए बहुविषयक शैक्षणिक भवन, लड़कों एवं अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए नए छात्रावासों के निर्माण के साथ-साथ सभागार और पुस्तकालय से संबंधित विभिन्न कार्य शामिल हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सी.पी. राधाकृष्णन ने गौहाटी विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। भारत रत्न गोपीनाथ बोरदोलोई सहित प्रख्यात नेताओं के नेतृत्व में चले एक सतत जन-आंदोलन के बाद 26 जनवरी, 1948 को पूर्वोत्तर भारत के पहले विश्वविद्यालय के रूप में गौहाटी विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय एनएएसी ए+ मान्यता प्राप्त करने के साथ-साथ एनआईआरएफ 2025 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में 9वां स्थान हासिल कर, इस क्षेत्र के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।
देश की भाषाई विरासत को संरक्षित करने की दिशा में विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा सभ्यता की स्मृति, ज्ञान और पहचान को समाहित करती है। उन्होंने असमिया और तमिल साहित्यिक कृतियों के परस्पर अनुवाद का स्वागत किया और असम और तमिलनाडु के बीच अधिक अकादमिक और साहित्यिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी सांस्कृतिक एकता से समृद्ध होती है।
सी.पी. राधाकृष्णन ने ब्रह्मपुत्र बेसिन, लुप्तप्राय भाषाओं, बहुभाषावाद, महिला अध्ययन, पर्यावरण स्थिरता और भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर विश्वविद्यालय के शोध की सराहना की। ब्रह्मपुत्र नदी को एक पारिस्थितिक, आर्थिक और सभ्यतागत शक्ति बताते हुए, उन्होंने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय चुनौतियों से निपटने वाले अनुसंधान के महत्व पर बल दिया।
वर्ष 2014 से भारत के उच्च शिक्षा तंत्र के विस्तार पर प्रकाश डालते हुए, सीपी राधाकृष्णन ने देश भर में शैक्षिक अवसरों के विस्तार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की सराहना की और नए आईआईटी, आईआईएम, ट्रिपल आईटी, केंद्रीय विश्वविद्यालय, एम्स और अन्य संस्थानों की स्थापना का उल्लेख किया। उन्होंने उच्च शिक्षा में महिलाओं के नामांकन में 42.2 प्रतिशत की वृद्धि का भी उल्लेख किया। वर्ष 2014-15 में जहां महिलाओं का नामांकन 1.57 करोड़ था, वर्ष 2023-24 में बढ़कर यह 2.24 करोड़ हो गया। उपराष्ट्रपति ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और शैक्षणिक उपलब्धियों को सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण संकेतक बताया।
उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिश्व सरमा के नेतृत्व में असम में हुई प्रगति की सराहना की, खासकर बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, शिक्षा, निवेश और रोजगार के क्षेत्रों में। उन्होंने राज्य की बेहतर शिक्षा व्यवस्था, आईआईएम गुवाहाटी में एमबीए के पहले बैच के प्रारंभ और 2021 से अब तक 1.64 लाख से अधिक योग्यता आधारित सरकारी नियुक्तियों का भी उल्लेख किया।
सीपी राधाकृष्णन ने छात्रों और विद्वानों से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान करते हुए, उनसे साहसिक लक्ष्य निर्धारित करने, सामुदायिक चुनौतियों का समाधान करने वाले अनुसंधान, प्रौद्योगिकी को मानवता की सेवा में लाने और नवाचार को समावेशी विकास का साधन बनाने का आग्रह किया। स्वामी विवेकानंद के शब्दों को उद्धृत करते हुए, उन्होंने युवाओं से कहा, “जागो, उठो और अपने लक्ष्य तक पहुंचने तक मत रुको।”
इस अवसर पर सीपी राधाकृष्णन ने अंकुरण दत्त और ननी गोपाल महंत द्वारा संपादित ‘भूपेन हजारिका: एक विचरण गीत के सौ वर्ष’ और चंद्रकांत अभिधान के पांचवें संशोधित और विस्तारित संस्करण का विमोचन किया।
उपराष्ट्रपति ने गौहाटी विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया, जहां असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित किया गया। उन्होंने छात्रों और अन्य प्रतिभागियों को “नशीली दवाओं को न” कहने की शपथ दिलाई और युवाओं से मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने, आत्म-अनुशासन का पालन करने, समय का सदुपयोग करने और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को सीमित करने का आग्रह किया।
इस कार्यक्रम में असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिश्व सरमा, शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू, मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, गौहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति ननी गोपाल महंत, रजिस्ट्रार प्रो. उत्पल सरमा, संकाय सदस्य, छात्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।





