संसद का शीतकालीन सत्र विकसित भारत – जी राम जी सहित कई महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने के साथ आज सम्पन्न हो गया। यह सत्र पहली दिसम्बर से शुरू हुआ था।
संसद का शीतकालीन सत्र, जो एक दिसंबर से शुरू हुआ था, आज संपन्न हो गया। सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ और चुनाव सुधारों पर विशेष चर्चा हुई। इसके अलावा, सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक भी पारित किए गए। इसमें विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण): जी राम जी बिल शामिल हैं। जिसने बीस वर्ष पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 का स्थान लिया है। इस विधेयक के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में सौ दिन की बजाय, एक सौ पच्चीस दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। संसद ने भारत के रूपांतरण के लिए परमाणु ऊर्जा का टिकाऊ उपयोग और विकास – शान्ति विधेयक 2025, सबका बीमा – सबकी सुरक्षा – बीमा कानूनों में संशोधन, विधेयक 2025, और निरसन और संशोधन विधेयक, 2025 को भी मंजूरी दी।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन भाषण में कहा कि सदन में लगभग एक सौ ग्यारह प्रतिशत काम-काज हुआ। माननीय सदस्यगण अब हम 18वीं लोकसभा के छठे सत्र की समाप्ति की ओर आ गए हैं। इस सत्र में हमने 15 बैठकें कीं। आप सभी के सहयोग से इस सत्र में सभा की उत्पादकता एक सौ 11 प्रतिशत रही। सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की जाती है।
राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने समापन भाषण में कहा कि सदन करीब 92 घंटे चला और 121 प्रतिशत कामकाज हुआ। सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सत्र के दौरान 59 निजी विधेयक पेश किए गए। सभापति ने कहा कि यह सत्र ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक महत्व के मुद्दों पर उच्च गुणवत्ता वाली बहस और चर्चाओं के लिए जाना जाएगा। सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि सदन ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर एक विशेष चर्चा की, जिसमें 82 सदस्यों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सदन ने चुनाव सुधारों पर भी चर्चा की, जिसमें 57 सदस्यों ने देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए अपने बहुमूल्य विचार साझा किए। सी.पी. राधाकृष्णन ने कल की बैठक के दौरान विपक्षी सदस्यों द्वारा पैदा की गई बाधा पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सदस्य आत्म-मंथन करेंगे और भविष्य में ऐसा अनुशासनहीन व्यवहार नहीं दोहराएंगे।





