अंतर्राष्ट्रीय

भारत-मिस्र संयुक्त व्यापार समिति (JTC) का छठा सत्र नई दिल्ली में सफलतापूर्वक आयोजित हुआ

भारत-मिस्र संयुक्त व्यापार समिति (जेटीसी) के छठे सत्र का आयोजन 16 और 17 सितंबर को नई दिल्ली में किया गया। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग की आर्थिक सलाहकार प्रिया पी. नायर और मिस्र अरब गणराज्य के निवेश और विदेश व्यापार उप मंत्री तथा मिस्र वाणिज्यिक सेवा के अध्यक्ष याह्या एल्वाथिक बेल्लाह की सह-अध्यक्षता में आयोजित किया गया। मिस्र के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत में मिस्र के राजदूत वाएल मोहम्मद अवाद हामिद और संबंधित मंत्रालयों के 08 प्रतिनिधि भी थे।

भारतीय पक्ष ने बताया कि राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (एनएसआईसी) और मिस्र की एमएसएमई विकास एजेंसी (एमएसएमईडीए) के बीच सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए आवश्यक मंजूरी मिल गई है। दोनों पक्षों ने शीघ्र हस्ताक्षर और कार्यान्वयन की इच्छा व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने व्यापार और निवेश में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए कई क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करने की पहचान की। इनमे स्वेज नहर आर्थिक क्षेत्र (एससीईजेड), फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य क्षेत्र, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम और खनन, एमएसएमई क्षेत्र, सीमा शुल्क मामले, सेवा क्षेत्र, आईटी सेवाएं, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, परिधान विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा – ग्रीन हाइड्रोजन, खाद्य सुरक्षा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निपटान और डिजिटल भुगतान, परिवहन और व्यापार विवाद आदि शामिल हैं। दोनों पक्षों ने कृषि उत्पादों पर बाजार पहुंच के मुद्दों पर भी चर्चा की और मुद्दों को जल्द से जल्द हल करने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी निवेश संवर्धन एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग पर भी सहमति जताई। भारत-मिस्र संयुक्त व्यापार परिषद के छठे सत्र में विचार-विमर्श सौहार्दपूर्ण और दूरदर्शी रहा, जो दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण और विशेष संबंधों का संकेत है। अधिक सहयोग, लंबित मुद्दों के समाधान और व्यापार एवं निवेश बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार में बाधा डालने वाले सभी मुद्दों का शीघ्रता से समाधान करने, दोनों देशों के बीच व्यापार संवर्धन को सुविधाजनक बनाने तथा जेटीसी की अगली बैठक 2026 में मिस्र में आयोजित करने पर सहमति व्यक्त की।

दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार की समीक्षा की और सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज करने, द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने तथा दोनों देशों के बीच व्यापार में बाधा डालने वाले मुद्दों के समाधान पर सहमति व्यक्त की।

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