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Lok Sabha Speaker Om Birla constitutes a three-member committee to investigate the corruption allegations against Justice Yashwant Verma
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भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया

दुनिया के देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। यह कदम इस बात का संकेत है कि भारत की संसद विश्व की विभिन्न संसदों के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद बढ़ाना चाहती है, ताकि पारंपरिक राजनय के साथ-साथ संसदीय स्तर पर भी मजबूत संबंध बने रहें ।

इन मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हैं। वरिष्ठ नेताओं में रवि शंकर प्रसाद, डॉ. एम. थंबीदुरई, पी. चिदंबरम, प्रो. राम गोपाल यादव, टी.आर. बालू, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असादुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, के.सी. वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, डॉ. शशि थरूर, डॉ. निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डॉ. डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, डॉ. सस्मित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत एकनाथ शिंदे, पी.वी. मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल सहित कई अन्य नेता शामिल हैं।

जिन देशों के साथ ये मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों से सीधे बात करने का अवसर देना है। वे अपने अनुभव साझा करेंगे, एक-दूसरे से सीख सकेंगे और नियमित संपर्क के जरिए आपसी विश्वास बढ़ाएंगे। इससे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती मिलेगी और आपसी समझ बेहतर होगी। इन समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीतियों, संस्कृति और आज की वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी।

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि संसदीय राजनय भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत बनाता है। उनके नेतृत्व में संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी की है और भारत को एक आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और परिपक्व लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है, जो संवाद और सहयोग में विश्वास रखता है।

संसद से संसद और जनता से जनता के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर देते हुए यह पहल विदेश संबंधों में एक व्यापक और भागीदारी आधारित दृष्टिकोण को दर्शाती है। ये मैत्री समूह नियमित संवाद, अध्ययन यात्राओं और संयुक्त बैठकों के माध्यम से दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देंगे । इस तरह भारत की संसद देशों के बीच एक सेतु के रूप में और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की सशक्त आवाज के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत करेगी।

उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत का पक्ष दुनिया के सामने रखने के लिए विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजे थे। अलग-अलग दलों और विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर यह संदेश दिया गया कि देश की सुरक्षा और हितों के मामले में भारत एकजुट है। इस पहल से संवाद, समावेश और सामूहिक जिम्मेदारी में विश्वास को दर्शाया गया – जो भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि राष्ट्र हित के मुद्दों पर भारत एक है। लोक सभा द्वारा 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह गठित करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लोक सभा अध्यक्ष द्वारा 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह गठित करने का निर्णय इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पहले चरण में जहाँ 60 से देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन किया गया है, वहीँ निकट भविष्य में कई अन्य देशों के साथ इन समूहों के गठन के प्रयास किये जा रहे हैं।

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