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An American industry delegation discussed opportunities for private investment in India nuclear sector with Dr. Jitendra Singh.
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अमेरिकी उद्योग प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ भारत के परमाणु सेक्टर में निजी निवेश के अवसरों पर चर्चा की

परमाणु ऊर्जा संस्थान (एनईआई) और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) के प्रतिनिधियों सहित एक उच्च स्तरीय अमेरिकी उद्योग प्रतिनिधिमंडल ने आज विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के साथ भारत के परमाणु क्षेत्र में निजी निवेश और उद्योग सहयोग के उभरते अवसरों पर विस्तृत चर्चा की।

यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम द्वारा आयोजित प्रतिनिधिमंडल यात्राओं में अमेरिकी परमाणु उद्योग के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, व्यावसायिक हितधारकों और नागरिक परमाणु ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकियों में भारत-अमेरिका सहयोग से जुड़े अधिकारी एकत्रित हुए।

इस चर्चा में भारत के महत्वाकांक्षी परमाणु ऊर्जा मिशन, निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को सक्षम बनाने वाले हाल के नीतिगत सुधारों और स्वच्छ ऊर्जा एवं महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में भारत-अमेरिका सहयोग के बढ़ते दायरे पर ध्यान केंद्रित किया गया। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, परमाणु ऊर्जा विभाग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अमेरिकी उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस विचार-विमर्श में भाग लिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और अमेरिका आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा और उभरते क्षेत्रों में एक मजबूत और भविष्योन्मुखी साझेदारी साझा करते हैं, जिसमें नागरिक परमाणु सहयोग लगातार रणनीतिक और आर्थिक महत्व प्राप्त कर रहा है। उन्होंने कहा कि 13 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच हुई बैठक के दौरान शुरू की गई यूएस-इंडिया ट्रस्ट पहल ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग के नए रास्ते खोल दिए हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि ट्रस्ट पहल, जो विश्वसनीय प्रौद्योगिकी साझेदारी, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और नवाचार इकोसिस्टम पर केंद्रित है, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, जैव प्रौद्योगिकी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सरकारों, उद्योग, शिक्षाविदों और स्टार्टअप्स के बीच गहन जुड़ाव के लिए एक मजबूत ढांचा प्रदान करती है।

विकसित भारत 2047 के विजन के तहत भारत के दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का लक्ष्य चरणबद्ध और सुनियोजित विस्तार रणनीति के माध्यम से 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करना है। उन्होंने कहा कि भारत का तेजी से बढ़ता परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विनिर्माण, प्रौद्योगिकी सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण और उन्नत अनुसंधान में वैश्विक साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा कर रहा है।

डॉ. सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि भारत ने हाल ही में शांति अधिनियम, 2025 लागू किया है, जो परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में विदेशी भागीदारी सहित निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को सुगम बनाने के उद्देश्य से किया गया एक महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार है। उन्होंने कहा कि इस सुधार से भारत के परमाणु ऊर्जा मिशन के अनुरूप निवेश, औद्योगिक सहयोग, विनिर्माण साझेदारी और प्रौद्योगिकी सहयोग के लिए अधिक अनुकूल वातावरण बनने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के कार्यान्वयन ढांचे को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि इस क्षेत्र में सहयोग के अवसरों को और सुदृढ़ किया जा सके।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत लगभग 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (एसएमआर) के विकास की योजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म रिएक्टरों, एआई-सक्षम परमाणु सुरक्षा प्रणालियों, वैज्ञानिक कंप्यूटिंग, परमाणु ऊर्जा मॉडलिंग और संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे उन्नत क्षेत्रों में भारत-अमेरिका सहयोग की महत्वपूर्ण संभावनाएं हैं।

इस चर्चा में भारत-अमेरिका की कई जारी सहयोगी पहलों में हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इनमें कोव्वाडा में प्रस्तावित वेस्टिंगहाउस एपी1000 परियोजना, भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्य समूह (सीएनईडब्ल्यूजी) के तहत सहयोग, हाइड्रोजन उत्पादन और एकीकृत ऊर्जा प्रणालियां, मशीन लर्निंग और एआई अनुप्रयोग, दुर्लभ पृथ्वी सहयोग और फर्मीलाब साझेदारी के माध्यम से उच्च-तीव्रता वाले सुपरकंडक्टिंग प्रोटॉन एक्सीलरेटर प्रौद्योगिकियां शामिल हैं।

बैठक में परमाणु ऊर्जा विभाग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित की जा रही लेजर इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल-वेव ऑब्जर्वेटरी (एलआईजीओ) – भारत परियोजना की प्रगति पर भी चर्चा हुई। यह परियोजना अमेरिका स्थित एलआईजीओ प्रयोगशाला और राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन के सहयोग से चलाई जा रही है। 2,600 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान के साथ स्वीकृत यह परियोजना भारत और अमेरिका के बीच उन्नत वैज्ञानिक सहयोग के सबसे महत्वपूर्ण उदाहरणों में से एक मानी जाती है।

यह वार्ता स्वच्छ ऊर्जा, परमाणु प्रौद्योगिकियों, उन्नत विनिर्माण और नवाचार-संचालित सेक्टरों में भारत और अमेरिका के बीच व्यावहारिक, उद्योग केन्द्रित और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग को गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ समाप्त हुई।

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