अमरीका और ईरान के बीच संघर्ष विराम समझौता लागू, शांति वार्ता के लिए 60 दिन की समय सीमा तय
अमरीका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक संघर्ष-विराम समझौता लागू हो गया है। इससे व्यापक शांति समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन की समय सीमा तय हो गई है। स्विट्जरलैंड में होने वाली बैठक से पहले डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित 14 सूत्रीय समझौते में तत्काल संघर्ष-विराम शामिल है। समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर समाधान के लिए एक ढांचा तैयार किया गया है।
समझौते के अंतर्गत अमरीका, ईरान के बंदरगाहों से नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शुरू करेगा और सामान्य समुद्री यातायात बहाल करने की दिशा में काम करेगा। ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
अमरीका और ईरान ने महीनों से जारी सैन्य टकराव को खत्म करने के मकसद से एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद औपचारिक रूप से एक नई कूटनीतिक प्रक्रिया शुरू की है। इस समझौते में तुरंत युद्धविराम, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और शांति के लिए एक व्यापक समझौते पर बातचीत करने की बात कही गई है। अमरीका ने समुद्री प्रतिबंधों में ढील देने और प्रतिबंधों से राहत दिलाने की दिशा में काम करने का वादा किया है, जबकि ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अंतरराष्ट्रीय निगरानी में अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर जताई गई चिंताओं को दूर करने पर सहमत हुआ है। इस समझौते में आर्थिक पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भविष्य में सहयोग के प्रावधान भी शामिल हैं। अब राजनयिकों के सामने अगले 60 दिनों के भीतर इस रूपरेखा को एक बाध्यकारी समझौते में बदलने का मुश्किल भरा काम है। हालांकि समर्थकों ने इस बड़ी कामयाबी का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में एक अहम कदम बताया है, लेकिन परमाणु सत्यापन, प्रतिबंधों को लागू करने और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर अभी भी काफी मतभेद बने हुए हैं।
समझौते के अंतर्गत लेबनान में संघर्ष विराम भी शामिल है।





