संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को लेकर भारत के प्रस्ताव को एक बार फिर से समर्थन मिला
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन के लिए भारत के लंबे समय से चले आ रहे प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिर से समर्थन मिला है। 140 सदस्यों द्वारा अपनाई गई संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक आतंकरोधी रणनीति की नौवीं समीक्षा में सदस्य देशों से आग्रह किया गया है कि वे भारत द्वारा तीन दशक पहले प्रस्तावित सम्मेलन को अंतिम रूप देने के लिए हर संभव प्रयास करें। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि सर्वमान्य कानूनी ढांचे का अभाव वैश्विक आतंकरोधी प्रयासों को कमजोर करता है। उन्होंने आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंड न अपनाने पर बल देते हुए अपराधियों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराने का आह्वान किया।
भारत दशकों से सीमा-पार आतंकवाद को झेल रहा है। हमने इसकी भारी कीमत चुकाई है। इसी अनुभव के चलते भारत ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति अपनाई है। आतंकवाद के सभी रूपों और तरीकों की निंदा की जानी चाहिए। भारत ने आतंकवाद के लिए फंडिंग को रोकने पर वैश्विक ध्यान केंद्रित करने की दिशा में काम किया है। भारत का मानना है कि आतंकवाद-विरोधी प्रयासों को राजनीति से प्रेरित बयानों से कमज़ोर नहीं किया जाना चाहिए।
अमरीका, इस्राएल और अर्जेंटीना ने प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया।





