सुप्रीम कोर्ट ने 18 वर्ष से कम उम्र और बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया
सर्वोच्च न्यायालय ने आज गैर आपराधिक रिकॉर्ड वाले 18 वर्ष से कम आयु के छात्र प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने अधिकारियों को नीट परीक्षा पेपर लीक के विरोध में हुए हालिया राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया।
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि पिछले सप्ताह हुए प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और पुलिस अधिकारियों को लगी चोट के आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। प्रदर्शनों के दौरान पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से संबंधित विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने कई अंतरिम निर्देश जारी किए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने प्रदर्शन वाले सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, कैमरा फुटेज, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, पीसीआर लॉग और प्रदर्शनों से संबंधित अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखें।
न्यायालय ने आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों से एकत्र किए गए डिजिटल डेटा को सुरक्षित रखा जाए, लेकिन उसे सार्वजनिक न किया जाए।
पीठ ने दिल्ली सरकार को दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन कहा कि कार्यवाही लंबित रहने के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
पीठ ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों से याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर जवाब भी मांगा।





