सरकार ने कहा है कि बैंक यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) और रू-पे द्वारा संचालित डेबिट कार्ड से 2,000 रुपये तक के लेनदेन या भुगतान पर शुल्क नहीं लगा सकते। सरकारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार कोई भी बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रदाता इन माध्यमों से लेनदेन करने वाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष शुल्क नहीं लगा सकता।
वित्त मंत्रालय ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क संबंधी नियमों को स्पष्ट करने के लिए भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम के अंतर्गत इन परिवर्तनों को अधिसूचित किया है। इसमें विशेष रूप से रू-पे द्वारा संचालित डेबिट कार्ड और यूपीआई से दो हजार रुपये तक के लेनदेन को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम के रूप में वर्गीकृत किया गया है। पिछले महीने, सरकार ने स्पष्ट किया था कि उपभोक्ताओं से यूपीआई भुगतान पर शुल्क नहीं लिया जाएगा।
भविष्य में लागू होने वाली कोई भी व्यापारी छूट दर -एमडीआर निर्दिष्ट सीमा से ऊपर के चुनिंदा लेनदेन तक ही सीमित रहेगी। ये शुल्क डेबिट या क्रेडिट कार्ड लेनदेन पर लागू एमडीआर से काफी कम होंगे। ये स्पष्टीकरण भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में हालिया संशोधन पर चल रही बहस के बीच आया है, जिसमें यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर शुल्क लगाए जाने की संभावना को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं।
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