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कैबिनेट ने रेल मंत्रालय की 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली अहमदाबाद (सरखेज) – धोलेरा सेमी हाई-स्पीड दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने आज रेल मंत्रालय की लगभग 20,667 करोड़ रुपये की लागत वाली अहमदाबाद (सरखेज) – धोलेरा सेमी हाई-स्पीड दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी दी है। स्वदेशी रूप से विकसित तकनीक से निर्मित भारतीय रेलवे की यह पहली सेमी हाई-स्पीड परियोजना होगी।

इस परियोजना खंड से अहमदाबाद, धोलेरा एसआईआर, धोलेरा का आगामी हवाई अड्डा और लोथल राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर (एनएचएमसी) के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। अहमदाबाद को धोलेरा से जोड़ने से यात्रियों का यात्रा समय कम होगा, जिससे दैनिक आवागमन आरामदायक होगा और एक ही दिन में वापसी यात्रा संभव हो सकेगी। यह सेमी हाई-स्पीड रेलवे न केवल दो शहरों को करीब लाएगा, बल्कि सैकड़ों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों को भी एक-दूसरे के करीब लाएगा।

भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना के रूप में यह परियोजना एक अग्रणी परियोजना के रूप में काम करेगी और देश भर में सेमी हाई-स्पीड रेल के चरणबद्ध विस्तार के लिए एक संदर्भ मॉडल के रूप में कार्य करेगी।

इस नये रेल लाइन प्रस्ताव से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी और आवागमन में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की कार्यकुशलता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। यह परियोजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नए भारत के विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। इससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

इस परियोजना को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्‍टीमॉडल संपर्क और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है। इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी।

गुजरात के अहमदाबाद जिले को शामिल करने वाली इस परियोजना से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 134 किलोमीटर की वृद्धि होगी।

प्रस्तावित परियोजनाओं से लगभग 284 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार होगा, जिनकी आबादी लगभग 5 लाख है।

पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन साधन होने के कारण रेलवे जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक लागत को कम करने, तेल आयात (0.48 करोड़ लीटर) को कम करने और कार्बनडाई ऑक्‍साइड उत्सर्जन (2 करोड़ किलोग्राम) को कम करने में मदद करेगा, जो 10 लाख पेड़ लगाने के बराबर है।

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