प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने आज महारत्न सीपीएसई पर लागू शक्तियों के प्रत्यायोजन संबंधी लोक उद्यम विभाग (डीपीई) के 4 फरवरी, 2010 के मौजूदा दिशानिर्देशों के तहत पावरग्रिड को अधिक शक्तियां सौंपने की मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी से पावरग्रिड की प्रति सहायक कंपनी इक्विटी निवेश की अनुमत सीमा वर्तमान 5,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,500 करोड़ रुपये हो गई है, जबकि कंपनी की कुल संपत्ति के 15 प्रतिशत की मौजूदा सीमा बरकरार रखी गई है।
इस मंजूरी से देश के सबसे बड़े और सबसे अनुभवी ट्रांसमिशन सेवा प्रदाता, पावरग्रिड को अपने मुख्य व्यवसाय में निवेश बढ़ाने और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के उपयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी, जिससे गैर-जीवाश्म-आधारित स्रोतों से 500 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।
अब पावरग्रिड अधिक पूंजी वाली ट्रांसमिशन परियोजनाओं, जैसे अल्ट्रा हाई वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट (यूएचवीएसी) और हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) ट्रांसमिशन नेटवर्क के लिए बोलियों में भाग ले सकता है। इसके अतिरिक्त, यह महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए बोलीदाताओं के चयन हेतु टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (टीबीसीबी) में प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। इससे बेहतर मूल्य निर्धारण सुनिश्चित होगा और अंततः उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।
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