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Cabinet has approved the continuation of a centrally sponsored scheme for fast-track special courts—aimed at the expeditious trial of cases involving rape and the POCSO Act—for a period of five years
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कैबिनेट ने दुष्‍कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों की त्वरित सुनवाई हेतु फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों के लिए केंद्र प्रायोजित योजना को पांच वर्ष की अवधि के लिए जारी रखने की मंजूरी दी

प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) के लिए केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) को पांच वर्ष की अवधि यानी 01.04.2026 से 31.03.2031 तक जारी रखने की मंजूरी दे दी है। इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 3,788.04 करोड़ रुपये (केंद्रीय हिस्सा 2,353.15 करोड़ रुपये और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का हिस्सा 1,434.89 करोड़ रुपये) है। केंद्रीय हिस्से को निर्भया फंड से वित्त पोषित किया जाएगा।

अनुमोदित योजना की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  1. योजना को पांच वर्ष यानी 01.04.2026 से 31.03.2031 तक जारी रखा जाएगा।
  2. इस योजना में विभिन्न भागीदार राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित 850 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) के संचालन का प्रावधान है।
  3. यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 के तहत दुष्‍कर्म और अपराधों से संबंधित लंबित मामलों के शीघ्र निपटान को सुगम बनाने के लिए समर्पित न्यायिक अधिकारी, विशेष लोक अभियोजक और 6 सहायक स्टाफ का प्रावधान।
  4. सीएसएस फंडिंग पैटर्न के अनुसार एफटीएससी के प्रचालनगत व्यय को पूरा करने के लिए भाग लेने वाले राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को वित्तीय सहायता का प्रावधान।

प्रमुख प्रभाव:

योजना को जारी रखने से निम्नलिखित प्रमुख प्रभाव पड़ने की उम्मीद है:

  • त्वरित न्याय प्रदान करना: यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए त्‍वरित सुनवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करना।
  • लंबित मामलों को कम करना: दुष्‍कर्म और पॉक्सो अधिनियम के लंबित मामलों की संख्या को कम करना।
  • बच्चों के अनुकूल और पीड़ित-केंद्रित वातावरण: यह योजना कमजोर गवाह बयान केंद्रों (वीडब्ल्यूडीसी) और बच्चों के अनुकूल अदालत स्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करती है ताकि पीड़ितों की गवाही को आगे संकट पैदा किए बिना सुविधाजनक बनाया जा सके।
  • असमानता में कमी: संवेदनशील समूहों (महिलाओं और बच्चों) से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देकर, इस योजना का उद्देश्य न्याय तक पहुंच में असमानताओं को कम करना है।

कार्यान्वयन रणनीति और लक्ष्य:

इस योजना को न्याय विभाग द्वारा संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के समन्वय से लागू किया जाएगा। प्रमुख कार्यान्वयन रणनीतियाँ और लक्ष्य इस प्रकार हैं:

  1. फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों (एफटीएससी) का विस्तार: वर्तमान 779 से 850 तक एफटीएससी के विस्तार का प्रावधान ताकि अतिरिक्त जिलों में कवरेज बढ़ाया जा सके। यह विस्तार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लंबित मामलों के आंकड़ों के आधार पर होगा।
  2. समर्पित कानूनी सहायता: त्वरित परीक्षण सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक एफटीएससी को विशेष रूप से सौंपे गए एक विशिष्‍ट विशेष लोक अभियोजक का प्रस्‍ताव।
  3. अनुकूलित कोर्ट स्टाफिंग: प्रशासनिक कार्यभार को सुव्यवस्थित करने और पुराने मामलों के शीघ्र निपटान की सुविधा के लिए प्रति एफटीएससी एक न्यायिक अधिकारी और छह सहायक कर्मचारियों का आवंटन।
  4. वित्तीय सहायता: अनुमोदित वित्त पोषण पैटर्न और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार भाग लेने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  5. निगरानी और मूल्यांकन: न्याय विभाग एफटीएससी डैशबोर्ड, आवधिक प्रगति रिपोर्ट, राज्य के व्यय विवरण के माध्यम से एफटीएससी के प्रदर्शन की निगरानी करेगा। विभाग उच्च न्यायालयों और राज्य सरकारों के साथ भी परामर्श करेगा और योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए उनकी प्रतिक्रिया लेगा।
  6. प्रदर्शन लक्ष्य: इस योजना का उद्देश्य दुष्‍कर्म और पॉक्सो अधिनियम के लंबित मामलों के निपटान की दर में सुधार करना, लंबित मामलों को कम करना और समयबद्ध सुनवाई की सुविधा प्रदान करना है।

इस योजना के प्राथमिक लाभार्थी महिलाएं और बच्चे हैं जो पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत दुष्‍कर्म और अपराधों की शिकार हैं।

इस योजना को 850 एफटीएससी तक कवर करने के लिए विस्तारित करने का प्रस्ताव है। इस विस्तार का उद्देश्य अतिरिक्त जिलों को शामिल करना है, जिनकी पहचान दुष्‍कर्म और पॉक्सो अधिनियम के लंबित मामलों के आधार पर की जाएगी।

पृष्ठभूमि:

यह योजना 02.10.2019 से प्रचालनगत है। दुष्‍कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के त्वरित निपटान के लिए समर्पित फास्ट ट्रैक अदालतों की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए इसे लगातार विस्तार दिया गया है। योजना की स्थिति इस प्रकार है:

विवरण 
लॉन्च की तारीख02.10.2019
भाग लेने वाले राज्य/केंद्र शासित प्रदेश29
विशेष पॉक्‍सो न्यायालयों सहित कुल कार्यात्मक एफटीएससी779 जिसमें 399 विशेष पॉक्सो न्यायालय शामिल हैं
स्कीम शुरू होने के बाद से निपटाए गए कुल मामले4,02,457
विस्तारित योजना के तहत एफटीएससी की प्रस्तावित संख्या850
स्वीकृत निरंतरता अवधि से 31.03.2031 तक

इस योजना ने दुष्‍कर्म और पॉक्सो अधिनियम के मामलों के निपटान के लिए समर्पित न्‍यायालय प्रदान करके यौन अपराधों के अपराध के लिए न्यायिक प्रतिक्रिया को सुदृढ़ करने में योगदान दिया है। न्याय विभाग नियमित रूप से एफटीएससी डैशबोर्ड के माध्यम से एफटीएससी के कामकाज की निगरानी करता है, उच्च न्यायालयों से समय-समय पर डेटा संग्रह करता है और संबंधित हितधारकों के साथ समीक्षा बैठकें करता है। इस योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने से न्यायपालिका की संस्थागत क्षमता और मजबूत होने, यौन अपराध के लंबित मामलों को कम करने और पीड़ितों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को समय पर न्याय सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों के लिए केंद्र प्रायोजित योजना आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के अनुसरण में 02.10.2019 को शुरू की गई थी और भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 25.07.2019 के निर्देशों के अनुपालन में स्वत: संज्ञान रिट (आपराधिक) संख्या 1/2019 में शुरू की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम, 2012 के तहत 100 से अधिक लंबित मामलों वाले जिलों में विशिष्‍ट विशेष न्यायालयों की स्थापना का निर्देश दिया था।

तदनुसार, केंद्र सरकार ने विशेष पॉक्सो न्यायालयों सहित समर्पित एफटीएससी स्थापित करने की योजना शुरू की। पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत दुष्‍कर्म और अपराधों से संबंधित लंबित मामलों के समयबद्ध निपटान पर बल दिया गया।

यह योजना आरंभ में एक वर्ष की अवधि के लिए शुरू की गई थी और बाद में इसे 31.03.2026 तक बढ़ा दिया गया था। वर्तमान अनुमोदन योजना को पांच वर्ष की अवधि यानी 31.03.2031 तक जारी रखना सुनिश्चित करता है।

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