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CBIC एवं भारत के स्थायी मिशन ने जिनेवा स्थित विश्व व्यापार संगठन में विशेष व्यापार सुविधा सत्रों का आयोजन किया

भारत सरकार के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में व्यापार सुविधा समिति की बैठक के दौरान 24 फरवरी 2026 को जिनेवा में व्यापार पर विशेष सत्रों का आयोजन किया।

विशेष सचिव और सदस्य (सीमा शुल्क) सुरजीत भुजबल ने जिनेवा में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सीबीआईसी सत्रों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। इस कार्यक्रम में व्यापार सुगमता और क्षमता निर्माण पर केंद्रित दो सत्र आयोजित किए गए, जिनमें डब्ल्यूटीओ व्यापार सुगमता समझौते (टीएफए) के तहत भारत द्वारा किए गए परिवर्तनकारी सुधारों पर प्रकाश डाला गया। यह कार्यक्रम जुलाई 2026 में होने वाली भारत की आठवीं व्यापार नीति समीक्षा से पहले आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में डब्ल्यूटीओ सदस्य देशों और सचिवालय के प्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी में लगभग 40 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए और यह भारत के अनुभव और सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों में उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है।

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार सुविधा अधिनियम (टीएफएपी) प्रतिबद्धताओं का अनुपालन हासिल करने के बाद, भारत राष्ट्रीय व्यापार सुविधा कार्य योजना (एनटीएफएपी 3.0) के अंतर्गत “टीएफए प्लस” उपायों की ओर बढ़ रहा है, जिसका उद्देश्य न्यूनतम आवश्यकताओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर विकसित हो रही सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप होना है। व्यापार सुविधा पर सत्र के दौरान, भारतीय सीमा शुल्क प्रतिनिधिमंडल ने सीमा शुल्क सुधारों में अपने ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ और व्यापक डिजिटलीकरण और प्रक्रिया पुनर्गठन के माध्यम से एक सरल, संपर्क रहित और कागज रहित सीमा शुल्क प्रणाली बनाने के अपने अग्रणी प्रयासों की जानकारी दी।

भारत ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने सभी टीएफए प्रतिबद्धताओं को 100 प्रतिशत अधिसूचित कर दिया है। यह प्रगति भारत की निम्नलिखित के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है:

  • पारदर्शिता बढ़ाना
  • विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय में सुधार करना, और
  • सीमा पार व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाना

सीबीआईसी ने अपने उन्नत और स्वदेशी रूप से विकसित प्रणालियों का प्रदर्शन निम्नलिखित रूप में किया:

  • सिंगल विंडो इंटरफेस के साथ व्यापक सीमा शुल्क स्वचालित प्रणाली
  • एक सुदृढ़ जोखिम प्रबंधन प्रणाली (आरएमएस)
  • अधिकृत आर्थिक संचालक (एईओ) कार्यक्रम
  • आगमन से पहले सीमा शुल्क प्रक्रिया और मूल डेटा का इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान (ईओडीईएस)
  • इलेक्ट्रॉनिक कार्गो ट्रैकिंग सिस्टम (ईसीटीएस)
  • आधुनिक सीमा शुल्क नियंत्रण प्रयोगशालाओं का नेटवर्क, और
  • समन्वित सीमा प्रबंधन (सीबीएम) और आभासी व्यापार गलियारों (वीटीसी) पर पहल

क्षमता निर्माण सत्र में विकासशील और अल्पविकसित देशों, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ अपनी विशेषज्ञता साझा करने में भारत की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया गया। राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी (एनएसीआईएन) के माध्यम से भारत, भारतीय और विदेशी सीमा शुल्क प्रशासन के अधिकारियों के लिए संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है। भारत की केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला (सीआरसीएल) द्वारा अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की जानकारी दी गई। इन दोनों को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा क्रमशः एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र और क्षेत्रीय सीमा शुल्क प्रयोगशाला के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह बताया गया कि वर्ष 2022 से, एनएसीआईएन ने 65 प्रशिक्षण आयोजित किए हैं और लगभग 30 देशों के 1,800 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को इन पहलों से लाभ हुआ है। इनमें से कई प्रशिक्षण डब्‍ल्‍यूसीओ, एडीबी और अन्य जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से आयोजित किए गए थे। इसी प्रकार, सीआरसीएल ने 300 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया। भारत ने व्यापार सुविधा समझौते की प्रतिबद्धताओं को लागू करने की उनकी क्षमता को मजबूत करने के लिए देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों के साथ साझेदारी करने की इच्छा व्यक्त की। प्रतिभागियों ने इन संस्थानों के अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और भारत के प्रमुख संस्थानों द्वारा प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण की सराहना की।

विशेष सचिव और सदस्य (सीमा शुल्क) सुरजीत भुजबल ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत द्वारा सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण ने व्यापार वृद्धि और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहन एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारतीय सीमा शुल्क का डिजिटल इकोसिस्टम व्यापारियों, सीमा शुल्क अधिकारियों, बैंकों और रसद संचालकों को जोड़ता है, सीमा शुल्क दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया को सुगम बनाता है, जिससे लेनदेन लागत कम होती है और निकासी का समय कम होता है। अनुपालन बोझ को कम करके, पूर्वानुमान में सुधार करके और ई-कॉमर्स निर्यात में अधिक भागीदारी को सक्षम बनाकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सशक्त बनाने में डिजिटल सुधारों की भूमिका पर विशेष बल दिया गया। सरलीकृत दस्तावेज़ीकरण, अग्रिम निर्णय और अधिकृत आर्थिक संचालक (एईओ) कार्यक्रम जैसी पहलों ने छोटे निर्यातकों को वैश्विक व्यापार नेटवर्क में शामिल होने में मदद की है।

सीबीआईसी के 2026 के लिए कारोबार में आसानी सुधारों में सीमा शुल्क निकासी के लिए एक एकल, परस्पर जुड़े डिजिटल विंडो और कस्टम इंटीग्रेटेड सिस्टम के माध्यम से डिजिटल व्यापार सुविधा पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके अलावा, जोखिम प्रणालियों में विश्वसनीय आयातकों को मान्यता देने वाली विश्वास-आधारित प्रणालियों के माध्यम से भौतिक सत्यापन को कम किया गया है और कारखाने से जहाज तक निकासी को सक्षम बनाया गया है। प्रमुख सुधारों में कुरियर निर्यात पर 10 लाख रुपये की मूल्य सीमा को हटाना भी शामिल है, जिससे निर्यातकों को कुरियर के माध्यम से किसी भी मूल्य का सामान भेजने की अनुमति मिलती है, जिससे एमएसएमई और ई-कॉमर्स निर्यातकों को लाभ होता है; दावा न किए गए या बिना स्‍वीकृति वाले अंतरराष्ट्रीय कुरियर शिपमेंट को विदेशी प्रेषकों को वापस करने के लिए ‘रिटर्न टू ओरिजिन’ (आरटीओ) की व्यवस्था; और ई-कॉमर्स निर्यात रिटर्न को संभालने के लिए एक सरलीकृत, जोखिम-आधारित सीमा शुल्क प्रारूप है।

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) जिनेवा में भारत के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि डॉ. सेंथिल पांडियन ने कहा कि भारत ने व्यापार सुगमता सुधारों को अपनी व्यापार नीति का एक मुख्य स्तंभ बनाया है। यूएनईएससीएपी ग्लोबल सर्वे 2023 के अनुसार, भारत ने व्यापार सुगमता कार्यान्वयन में 93 प्रतिशत से अधिक का समग्र स्कोर हासिल किया है, जिससे यह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अग्रणी और दक्षिण एशिया में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल हो गया है। भारत ने पारदर्शिता, औपचारिकताएं, संस्थागत व्यवस्था और सहयोग तथा कागजी रहित व्यापार जैसे क्षेत्रों में पूर्ण कार्यान्वयन स्‍तर प्राप्त कर लिया है। ये परिणाम व्यापार सुगमता सुधार के उद्देश्यों और नियमों के साथ घरेलू सुधारों को संरेखित करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं।

साझेदार देशों से इस आयोजन के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की और इसने राष्ट्रीय अनुभवों के आदान-प्रदान और तकनीकी सहयोग के मंच के रूप में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के महत्व को पुनः स्थापित किया। “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना से प्रेरित होकर, भारत ने विकासशील देशों में व्यापार सुगमीकरण ढांचे को मजबूत करने और क्षमता निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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