सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश, आयु या लिंग को ध्यान में रखते हुए सभी पर लागू होता है। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने इसका पालन नहीं करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश दिया है।
शीर्ष न्यायालय इसका अनुपालन न करने वाले राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों को अदालत के समक्ष पेश होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। न्यायालय ने इससे पहले पुलिस को सभी गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में बिना किसी प्रारंभिक जांच के तुरंत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था। अदालत ने गुमशुदा बच्चों का पता लगाने और उनकी सुरक्षा के लिए भी उपाय लागू किए थे।
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