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केंद्र, नागालैंड सरकार और पूर्वी नागालैंड पीपुल्‍स ऑर्गेनाइजेशन ने फ्रंटियर नागालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी के गठन के लिए एक समझौते पर हस्‍ताक्षर किये

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शांतिपूर्ण और समृद्ध पूर्वोत्तर के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर आज भारत सरकार, नगालैंड सरकार और ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के प्रतिनिधियों के बीच नई दिल्ली में एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। ENPO नगालैंड के छह पूर्वी जिलों के आठ मान्यता प्राप्त नगा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाला शीर्ष संगठन है।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते से नगालैंड के छह जिलों — तुएनसांग (Tuensan), मोन (Mon), किफिरे (Kiphire), लॉन्गलेंग (Longleng), नोकलाक (Noklak) और शमाटोर (Shamator) —के लिए फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) के गठन का मार्ग प्रशस्त होगा और FNTA को 46 विषयों के संबंध में शक्तियों का हस्तांतरण किया जाएगा।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन विवादमुक्त उत्तर पूर्व के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उग्रवादमुक्त, हिंसामुक्त, विवादमुक्त और विकसित नॉर्थ पूर्वी की जो कल्पना की है उसमें हम आज एक कदम और आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि 11 साल पहले पूर्वोत्तर में कई हथियारबंद ग्रुप्स और विवाद उत्तर पूर्व की शांति को बिखराव की दिशा में ले जाते थे। साथ ही कई अंतर राज्य विवाद राज्यों की शांति को भंग करते थे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार हर विवाद का समाधान खोजने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि 2019 से अब तक मोदी सरकार ने नॉर्थ ईस्ट में 12 महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें केवल समझौते करती थीं, लेकिन मोदी सरकार की परंपरा रही है कि हम जो समझौते करते हैं, उन्हें अक्षरशः और भावनात्मक रूप से पूर्णतः लागू भी करते हैं। गृह मंत्री ने कहा कि वे ENPO के प्रतिनिधियों को यह विश्वास दिलाना चाहते हैं कि भारत सरकार पूर्वी नागालैंड के विकास में सहायता भी करेगी और इसकी जिम्मेदारी भी उठाएगी। भारत सरकार ईस्टर्न नागालैंड के विकास में मदद भी करेगी और जिम्मेदारी भी उठाएगी। अमित शाह ने कहा कि प्रत्येक वर्ष एक निश्चित राशि निर्धारित की जाएगी तथा गृह मंत्रालय establishment के लिए प्रारंभिक व्यय भी वहन करेगा।

अमित शाह ने कहा कि 2021-22 में ENPO के प्रतिनिधियों से कहा था कि नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार हर विवाद का समाधान ढूँढना चाहती है। ENPO भरोसा रखे और democratic process में हिस्सा ले उन्हे उचित न्याय और सम्मान दोनों जरूर मिलेगा। गृह मंत्री ने कहा कि आज उन्हे बहुत हर्ष हो रहा है कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों द्वारा ENPO और नगालैंड सरकार बीच लंबे समय तक एक ब्रिज के रूप में काम किया जाने के बाद आज हम हम इस विवाद को हल कर सके हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि हम सब ENPO क्षेत्र और इसके कूटनीतिक महत्व को बहुत अच्छी तरह जानते हैं। नगालैंड की रचना के बाद ईस्टर्न नागालैंड के नागरिकों के मन में लगातार यह भाव था कि उन्हे न्याय नहीं मिल रहा है। अमित शाह ने कहा कि उन्होंने नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो जी से बात की थी और रियो जी ने बड़े हर्ष के साथ कहा था कि वे ENPO की सारी मांगों को पूरे मन के साथ सुनेंगे, चर्चा करेंगे और स्वीकार भी करेंगे। गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री नेफिउ रियो का धन्यवाद करते हुए कहा कि नगालैंड सरकार, मंत्रिमंडल के साथियों और राज्य के दोनों सांसदों ने बहुत बड़े मन के साथ इस नेगोशिएशन को लॉजिकल अंत तक पहुंचाया है।

अमित शाह ने कहा कि आज एक बहुत लंबे समय से चल रहे विवाद का सुखद अंत हुआ है। उन्होंने ईस्टर्न नागालैंड के सभी लोगों, ENPO के सभी संघर्षरत संगठनों, नगालैंड के मुख्यमंत्री, कैबिनेट और सांसदों को बधाई देते हुए कहा कि नगालैंड में सारे विवाद समाप्त होने की दिशा में हम आज एक कदम और आगे बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि अब ईस्टर्न नगालैंड के विकास के बीच में कोई रोड़ा नहीं रहेगा। भारत सरकार और नगालैंड सरकार दोनों मिलकर ईस्टर्न नगालैंड के विकास को आगे बढ़ाएंगे।

यह समझौता, अन्य बातों के अलावा, FNTA के लिए एक मिनी-सचिवालय के गठन का प्रावधान करता है, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव द्वारा किया जाएगा। साथ ही, पूर्वी नगालैंड क्षेत्र के लिए विकास व्यय का आबादी और क्षेत्रफल के अनुपात में बंटवारा भी किया जाएगा। हालांकि, यह समझौता भारत के संविधान के अनुच्छेद 371(A) के प्रावधानों को किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं करता है।

यह अनूठी व्यवस्था पूर्वी नगालैंड के समग्र विकास की कल्पना करती है, जिसमें वित्तीय स्वायत्तता, बेहतर निर्णय-प्रक्रिया, बुनियादी ढांचे का तेज विकास, आर्थिक सशक्तिकरण और संसाधनों का अधिकतम उपयोग शामिल है।

यह समझौता पूर्वोत्तर के लोगों की वास्तविक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए सभी विवादास्पद मुद्दों को संवाद के माध्यम से हल करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांत को भी सिद्ध करता है कि समाधान केवल आपसी सम्मान और संवाद पर आधारित बातचीत से ही प्राप्त किए जा सकते हैं, न कि हिंसा और सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से।

इस ऐतिहासिक समझोते के अवसर पर नगालैंड के उप-मुख्यमंत्री यांथुंगो पैटन, उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति, केन्द्रीय गृह मंत्रालय और नगालैंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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