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केंद्र ने बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए 3,324 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की

केंद्र सरकार ने बिहार, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई)/ग्रामीण स्थानीय निकायों (आरएलबी) को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग के अप्रतिबंधित अनुदान की दूसरी किस्त स्वीकृत एवं जारी की है ताकि जमीनी स्तर पर शासन को और ज्यादा सशक्त एवं आवश्यकता आधारित स्थानीय विकास को सक्षम बनाया जा सके।

इस किश्त के अंतर्गत, बिहार को 80,240.00 लाख रुपये (802.40 करोड़ रुपये) प्राप्त हुए हैं, जिससे सभी 38 जिला पंचायतों (डीपी), 533 ब्लॉक पंचायतों (बीपी) और 8,053 ग्राम पंचायतों (जीपी) को लाभ हुआ है, साथ ही 3 ब्लॉक पंचायतों और 7 ग्राम पंचायतों के लिए पहली किश्त के रोके गए हिस्से से 139.10 लाख रुपये (1.39 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त राशि जारी की गई है, जो अब इसका पात्र बन चुकी हैं। इसी प्रकार, हरियाणा में पात्र 19 डीपी, 138 बीपी और 6,194 जीपी को कवर करते हुए 19,762.70 लाख रुपये (197.627 करोड़ रुपये) जारी किए गए हैं, साथ ही पहले रोकी गई राशि से अतिरिक्त पात्र 1 डीपी, 4 बीपी और 30 जीपी को 249.80 लाख रुपये (2.50 करोड़ रुपये) जारी किए गए हैं।

हिमाचल प्रदेश के लिए, सभी 12 जिला पंचायतों, पात्र 80 ब्लॉक पंचायतों और 3,602 ग्राम पंचायतों के लिए 6,830.03 लाख रुपये (68.30 करोड़ रुपये) जारी किए गए, साथ ही 26 अतरिक्त पात्र ग्राम पंचायतों को 34.53 लाख रुपये (0.35 करोड़ रुपये) भी जारी किए गए। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिला पंचायतों, 826 ब्लॉक पंचायतों और 57,694 ग्राम पंचायतों के लिए 1,55,940.00 लाख रुपये (1,559.40 करोड़ रुपये) जारी किए गए, इसके अलावा, रोके गए हिस्से से 2 डीपी, 13 बीपी और 61 जीपी को 1,101.64 लाख रुपये (11.016 करोड़ रुपये) भी जारी किए गए, जो पात्रता प्राप्त कर चुके हैं।

पश्चिम बंगाल को इसी किस्त के अंतर्गत पात्र 21 डीपी, 335 बीपी और 3,225 ग्राम पंचायतों के लिए 68,085.79 लाख रुपये (680.86 करोड़ रुपये) जारी किए गए हैं।

भारत सरकार पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) के माध्यम से ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए राज्यों को पंद्रहवीं वित्त निधि अनुदान जारी करने की सिफारिश करती है, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय इसे जारी करता है। निर्धारित अनुदान एक वित्तीय वर्ष में दो किस्तों में सिफारिश एवं जारी की जाती है। अप्रतिबंधित अनुदान का उपयोग पंचायत राज संस्थाओं/ग्रामीण स्थानीय निकायों द्वारा स्थान-विशिष्ट आवश्यकताओं के लिए किया जाता है, संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में निहित उन 29 विषयों के अंतर्गत जिसमें वेतन और अन्य स्थापना लागत शामिल नहीं हैं। बाध्य अनुदानों का उपयोग बुनियादी सेवाओं के लिए किया जा सकता है, जिनमें (क) स्वच्छता एवं ओडीएफ स्थिति का रखरखाव शामिल है और इसमें घरेलू कचरे का प्रबंधन एवं उपचार, विशेष रूप से मानव मल और मल कीचड़ प्रबंधन शामिल होना चाहिए और (ख) पीने के पानी की आपूर्ति, वर्षा जल संचयन और जल पुनर्चक्रण शामिल है।

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