छत्तीसगढ विधानसभा ने धार्मिक स्वतंत्रता विधेयक को ध्वनि-मत से पारित कर दिया है। इस विधेयक का उद्देश्य धोखे से, बलपूर्वक, प्रलोभन देकर या डिजिटल तरीके से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाई गई है। विपक्ष ने इस विधेयक के विरोध में सदन का बहिष्कार किया। विपक्ष का कहना था कि इस तरह के 11 राज्यों से संबंधित मामले सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद ही इस मामले में आगे बढ़ा जाना चाहिए। विधेयक में गलत तरीके से धर्मांतरण को गैर-जमानती अपराध माना गया है, जिसके लिए सात से दस साल तक की सज़ा हो सकती है। इसके अलावा, दोषी पाए जाने पर न्यूनतम पांच लाख रूपए तक का जुर्माना भी भरना होगा।
नई दिल्ली: जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची भारत की आधिकारिक यात्रा पर दिल्ली पहुंचीं। केंद्रीय…
भारतीय नौसेना के युद्धपोत ‘तरकश’ और ‘इक्षक’ ने 29 जून, 2026 को सेशेल्स के पोर्ट…
भारत व मलेशिया के बीच सैन्य सहयोग को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से भारत–मलेशिया…
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने भारत सरकार द्वारा जन स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत…
सिग्नलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण और परिचालन सुरक्षा को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम…
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली में बदलाव लाने के उद्देश्य…