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वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने वाशिंगटन डी.सी. में छठे भारत-अमेरिका वाणिज्यिक संवाद की सह-अध्यक्षता की

भारत सरकार के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो की संयुक्त अध्यक्षता में आज वाशिंगटन डी.सी. के अमेरिकी वाणिज्य विभाग में लगातार छठा भारत-अमेरिका वाणिज्यिक संवाद आयोजित किया गया।

दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के माहौल को बेहतर बनाने के लिए संवाद आयोजित किया गया है, जिसमें नई और उभरती प्रौद्योगिकियों पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है। संवाद के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में – 1. आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, 2. जलवायु और स्वच्छ प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग 3. समावेशी डिजिटल विकास, और 4. मानक और अनुरूपता सहयोग शामिल हैं।

सप्लाई चेन ट्रैक के तहत, दोनों देशों ने “महत्वपूर्ण खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं का विस्तार और विविधीकरण” के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पूरक शक्तियों का लाभ उठाएगा और भारत एवं अमेरिका के महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, निष्कर्षण, प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग और इससे संबंधित अन्य गतिविधियों के पारस्परिक रूप से लाभकारी विकास को सुविधाजनक बनाएगा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत कैथरीन ताई के साथ एक-एक द्विपक्षीय वार्ता भी की और आपसी हितों से जुड़े क्षेत्रों के बारे में चर्चा की। उन्होंने भारत-अमेरिकी व्यापार नीति फोरम के तहत चल रहे द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के मार्ग और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

भारत-अमेरिका वाणिज्यिक वार्ता के दौरान पीयूष गोयल ने कार्लाइल समूह के अध्यक्ष विलियम ई. कॉनवे जूनियर और सीमेंस एवं एईएस कंपनी फ्लूएंस एनर्जी के सीईओ जूलियन नेब्रेडा के साथ आमने-सामने की बैठकें कीं।

बाद में, पीयूष गोयल को अमेरिकी थिंकटैंक, सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) द्वारा “भारत के उभरते विनिर्माण परिदृश्य” विषय पर मुख्य भाषण के लिए आमंत्रित किया गया। अपने संबोधन में पीयूष गोयल ने अग्रणी विनिर्माण गंतव्य बनने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अत्यधिक जुड़ने के लिए भारत के नए प्रयासों के बारे में बताया।

पीयूष गोयल ने मीडिया से बातचीत के साथ यात्रा का समापन किया, जहां उन्होंने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय वाणिज्यिक और व्यापार संबंधों को मजबूत करने, निवेश को सुविधाजनक बनाने और तकनीकी परिवर्तन के साथ तालमेल बनाए रखते हुए रोजगार सृजन के लिए भारत के नवाचार संबंधी इकोसिस्टम का समर्थन करने की भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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