रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (OGEL) ढांचे को सरल बनाने के लिए व्यापक सुधार किए
रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) ढांचे को सरल बनाने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। ये सुधार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भारत को एक विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद वैश्विक रक्षा विनिर्माण और निर्यात भागीदार बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, साथ ही मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में भी सहायक हैं। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में किए गए इन सुधारों का उद्देश्य प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को कम करना, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक शीघ्र पहुंच को सुगम बनाना और भारतीय रक्षा कंपनियों को वैश्विक व्यापार अवसरों का अधिक प्रभावी ढंग से लाभ उठाने में सक्षम बनाना तथा साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी मामले पूरी तरह से संरक्षित रहें।
रक्षा निर्यात मानक संचालन प्रक्रिया
- अधिकांश गंतव्यों के लिए गैर-घातक रक्षा वस्तुओं के निर्यात के लिए हितधारकों से परामर्श की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है, जबकि संवेदनशील देशों के लिए उचित सुरक्षा उपाय बरकरार रखे गए हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय निविदाओं और प्रदर्शनियों के लिए सभी वस्तुओं के निर्यात हेतु हितधारकों से परामर्श की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है, जिससे भारतीय कंपनियों को अपने उत्पादों का प्रदर्शन करने और अंतर्राष्ट्रीय अवसरों का अधिक शीघ्रता से लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
ओजीईएल फ्रेमवर्क
ओजीईएल एक स्थायी, एकमुश्त निर्यात लाइसेंस है जो पात्र निर्यातकों को निर्दिष्ट रक्षा वस्तुओं की आपूर्ति के लिए अलग-अलग मंजूरी प्राप्त किए बिना निर्यात में सक्षम बनाता है। यह बार-बार दोहराई जाने वाली प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं को कम करता है।
- प्रमुख प्लेटफार्मों और उपकरणों, पुर्जों और घटकों, और अंतर-कंपनी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए तीन मौजूदा ओजीईएल एसओपी को एक एकीकृत ओजीईएल एसओपी में समेकित किया गया है, जो निर्यातकों को एक सामान्य और सरल ढांचा प्रदान करता है।
- ओजीईएल की वैधता दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है, जिससे नवीनीकरण और संबंधित अनुपालन आवश्यकताओं में कमी आई है।
- ओजीईएल का दायरा 41 देशों से बढ़ाकर सभी देशों तक कर दिया गया है, सिवाय उन नकारात्मक/संवेदनशील देशों और उन देशों के जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों या हथियार प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं।
- एक नए प्रावधान से विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (एफओईएम) के साथ दीर्घकालिक अनुबंध या समझौते करने वाली भारतीय कंपनियों को सुविधा मिलेगी। ओजीईएल योग्य वस्तुओं और संबंधित एफओईएम के लिए प्रदान किया जा सकता है, जिसकी वैधता मूल अनुबंध या समझौते के अनुरूप होगी, और यह निर्धारित शर्तों के अधीन होगा।
- ओजीईएल के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं की श्रेणी का विस्तार किया गया है, जिससे पात्र निर्यातकों को अधिक सुविधा मिली है। संशोधित ढांचा छोटे हथियारों और सुरक्षा उपकरणों के विशिष्ट पुर्जों और घटकों के नागरिक उपयोग के लिए निर्यात की भी अनुमति देता है, जिससे वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसर और भी व्यापक हो जाते हैं।
इन सुधारों से भारत की रक्षा निर्यात व्यवस्था अधिक व्यापक और सुगम प्रणाली की ओर अग्रसर होगी, जिससे नियमित प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं में कमी आएगी और संवेदनशील वस्तुओं, प्रौद्योगिकियों और गंतव्यों के लिए उचित सुरक्षा उपाय बरकरार रहेंगे। इन उपायों से भारतीय रक्षा निर्माताओं, जिनमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी शामिल हैं, को विशेष रूप से लाभ होने की उम्मीद है, क्योंकि इससे वे अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और प्रदर्शनियों में तेजी से प्रतिक्रिया दे सकेंगे, व्यापक वैश्विक बाजारों तक पहुंच बना सकेंगे और बार-बार मंजूरी संबंधी आवश्यकताओं से मुक्त हो सकेंगे। वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा उत्पादन सर्वकालिक उच्च स्तर 1.78 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचने के साथ, ये सुधार भारत के रक्षा विनिर्माण और निर्यात इकोसिस्टम की गति को और मजबूत करेंगे।





