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first meeting of the India-Kuwait Joint Defence Committee (JDC) was held in New Delhi today
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भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति -जेडीसी की प्रथम बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित हुई

भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति -जेडीसी की प्रथम बैठक आज नई दिल्ली में आयोजित हुई। बैठक में दोनों देशों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास, सैन्य चिकित्सा, अधिकारिक सैन्य वार्ता, रक्षा उद्योग तथा अनुसंधान एवं विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढाने पर सहमति व्यक्त की।

भारत और कुवैत के बीच रक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन में उल्लिखित उद्देश्यों को क्रियान्वित करने की दिशा में भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति की प्रथम बैठक महत्वपूर्ण कदम है। PM नरेन्द्र मोदी की दिसंबर 2024 में कुवैत यात्रा के दौरान इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे।

बैठक की सह-अध्यक्षता रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और कुवैती प्रतिनिधिमंडल के ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसकरान ने की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में थल, वायु और नौसेना सहित तीनों सेनाओं, रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- डीआरडीओ, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि शामिल हुए।

संयुक्त रक्षा समिति की बैठक से पहले, ब्रिगेडियर जनरल राएद अलसकरान ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय समर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर सैन्य शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कुवैती प्रतिनिधिमंडल ने अपनी यात्रा के पहले दिन नई दिल्ली स्थित रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम के डीपीएसयू भवन का दौरा किया, जहां उन्होंने भारतीय रक्षा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ परस्पर सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की। यात्रा के दूसरे दिन कुवैती प्रतिनिधिमंडल की उद्योग जगत के साथ वार्ता भी निर्धारित है।

भारत और कुवैत के बीच पारंपरिक तौर पर सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। इनकी जड़ें ऐतिहासिक संबंधों में निहित हैं जो समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं। दोनों देशों के बीच 1962 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान इस संबंध को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर समुन्नत बनाया गया था। भौगोलिक निकटता, ऐतिहासिक व्यापारिक संबंध, सांस्कृतिक समानताएं और कुवैत में बड़ी संख्या में भारतीयों की उपस्थिति, दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक और बहुआयामी संबंधों को निरंतर प्रगाढ बनाने और पोषित करने में सहायक रही हैं।

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