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CSIR एवं विदेश मंत्रालय ने संयुक्त रूप से नई दिल्ली में “क्षमता खोज सत्र” के लिए वैश्विक दक्षिण के राजदूतों की मेजबानी की

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और विदेश मंत्रालय, भारत सरकार ने संयुक्त रूप से नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में वैश्विक दक्षिण देशों के राजदूतों एवं उच्चायुक्तों के लिए एक उच्च स्तरीय “क्षमता खोज सत्र” का आयोजन किया। इस सत्र में ओशिनिया, खाड़ी देशों, पश्चिम एशिया, उत्तरी अफ्रीका, मध्य अमेरिका और कैरेबियन देशों के राजनयिकों ने हिस्सा लिया।

इस सत्र का नेतृत्व भारत विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा ​​तथा सीएसआईआर की महानिदेशक और वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने संयुक्त रूप से किया।

इस सत्र का उद्देश्य सतत विकास, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य समानता, खाद्य एवं जल सुरक्षा, सुदृढ़ अवसंरचना और समावेशी तकनीकी विकास सहित वैश्विक प्राथमिकताओं के अनुरूप विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसटीआई) के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग को सुदृढ़ करना है। कार्यक्रम का आयोजन सीएसआईआर के अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मामलों के निदेशालय (आईएसटीएडी) द्वारा किया गया।

आईएसटीएडी के प्रमुख डॉ. रामा स्वामी बंसल ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और वैज्ञानिक ज्ञान को व्यावहारिक एवं किफायती समाधानों में परिवर्तित करने वाली वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने सीएसआईआर के अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रकाश डाला, जिसमें स्वास्थ्य सेवा, कृषि, पर्यावरण इंजीनियरिंग, समुद्र विज्ञान, अवसंरचना एवं उन्नत सामग्री जैसे क्षेत्रों में क्रियाशील 37 प्रयोगशालाएं शामिल हैं। उन्होंने प्रौद्योगिकी के सह-विकास एवं तैनाती के लिए कनेक्ट, कोलैबोरेट, कन्वर्ज और कन्वर्ट दृष्टिकोण पर आधारित सीएसआईआर के वैश्विक सहभागिता संरचना पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर सुलभ, प्रासंगिक, किफायती एवं वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने सीएसआईआर और वैश्विक दक्षिण देशों के बीच सहयोग के लिए संयुक्त परियोजनाओं, दोतरफा आवागमन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं ज्ञान साझाकरण का स्वागत किया।

विदेश मंत्रालय की सचिव (दक्षिण) डॉ. नीना मल्होत्रा ​​ने वैश्विक दक्षिण में साझा विकासात्मक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में विज्ञान कूटनीति की भूमिका पर बल दिया, विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता एवं सतत संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में। उन्होंने वैश्विक दक्षिण के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संबंधों को मजबूत करने में सीएसआईआर की भूमिका एवं क्षमताओं की जानकारी दी।

विषयगत प्रस्तुतियों के दौरान, सीएसआईआर के वैज्ञानिकों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने वाली प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। सीएसआईआर-एनआईआईएसटी के निदेशक डॉ. सी. आनंदरामकृष्णन ने किफायती खाद्य प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग समाधान प्रस्तुत किया; सीएसआईआर के विशिष्ट वैज्ञानिक डॉ. राम विश्वकर्मा ने औषधीय अनुसंधान एवं रोगाणुरोधी प्रतिरोध से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला; सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई के उत्कृष्ट वैज्ञानिक डॉ. कन्नन श्रीनिवासन ने विलवणीकरण एवं अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण प्रौद्योगिकियों पर प्रस्तुति दी; सीएसआईआर-एनईआरआई के निदेशक डॉ. एस. वेंकट मोहन ने बायोमास मूल्यवर्धन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोणों पर चर्चा की। सीएसआईआर-एनआईओ के निदेशक प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह ने सतत समुद्री संसाधन उपयोग और महासागर-जलवायु संबंधों पर प्रकाश डाला जबकि सीएसआईआर-सीआरआरआई के निदेशक डॉ. चालुमुरी रवि शेखर ने कार्बन निर्माण में कमी एवं लचीली अवसंरचना में नवाचारों का प्रदर्शन किया।

अपने समापन भाषण में, डॉ. राम विश्वकर्मा ने भागीदार देशों को वैश्विक दक्षिण में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने एवं सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को लागू करने में सीएसआईआर के साथ सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया।

इस कार्यक्रम ने वैश्विक दक्षिण के लिए एक प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में सीएसआईआर की भूमिका की पुष्टि की और सतत विकास के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में भारत के नेतृत्व को रेखांकित किया।

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