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Advanced Medium Combat Aircraft Core Integration and Flight Testing Centre, and the Naval Systems Manufacturing Centre
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रक्षा मंत्री और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के कोर इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर और नौसेना प्रणाली विनिर्माण केंद्र की आधारशिला रखी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्र बाबू नायडू ने आज आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले के पुट्टपर्थी में कई रणनीतिक एयरोस्पेस और रक्षा परियोजनाओं की आधारशिला रखी और भूमि पूजन समारोह की अध्यक्षता की। पुट्टपर्थी में कोर इंटीग्रेशन एंड फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर की आधारशिला रखी गई, जिसका उद्देश्य पांचवीं पीढ़ी के मध्यम श्रेणी के उन्नत लड़ाकू विमान (एएमसीए) और भविष्य के अन्य स्वदेशी प्लेटफार्म को तेजी से विकसित करना है। इसके अलावा, अनाकापल्ली जिले के टी सिरासापल्ली गांव में नौसेना प्रणाली विनिर्माण सुविधा की भी आधारशिला रखी गई, जिसका उद्देश्य उन्नत पनडुब्बी हथियार और नौसैनिक युद्ध प्रणालियों की आवश्यकताएं पूरी करना है।

श्री सत्य साई जिले के मदाकासिरा में रक्षा ऊर्जा संयंत्र और गोला बारूद एवं विद्युत फ्यूज संयंत्र के लिए भूमि पूजन समारोह आयोजित किए गए। इसके अलावा, आठ ड्रोन कंपनियों के एक संघ ने कुरनूल में ड्रोन सिटी स्थापित करने के लिए आपस में सहयोग किया है। विभिन्न कंपनियों ने राज्य में रक्षा इकाइयां स्थापित करने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर भी किए।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में परियोजनाओं आरंभ किए जाने को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में, अन्य देशों पर निरंतर निर्भरता की अपेक्षा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने का लक्ष्य होना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने कहा कि ये परियोजनाएं रक्षा बलों की सभी शाखाओं की आवश्यकताएं पूरी करेंगी। उन्होंने कहा कि यह रणनीतिक विविधीकरण महज संयोग नहीं है बल्कि हमारा स्पष्ट उद्देश्य है और हम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के दृढ़ लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सेना के तीनों अंगों को भविष्य अनुरूप तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं राष्ट्र की आत्मनिर्भरता और आंध्र प्रदेश के विकास पथ में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं शक्तिशाली “विकास केंद्र” के रूप में काम करेंगी, जिससे व्‍यापक रोजगार सृजन होगा। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईटीआई सहित स्थानीय शैक्षणिक संस्थान इस पहल का अभिन्न अंग बनेंगे। इससे सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाएं स्थापित होंगी और लघु उद्योग विकसित होंगे तथा स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम करने, सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इससे एक संपूर्ण पारितंत्र विकसित होगा, जो राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम के लिए कुल व्यय लगभग 15 हजार करोड़ रुपये है, और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन -डीआरडीओ की सहयोगी संस्था वैमानिकी विकास एजेंसी का कोर इंटीग्रेशन और फ्लाइट टेस्टिंग सेंटर इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस केंद्र की स्थापना लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत से की जा रही है। रक्षा मंत्री ने कहा कि पुट्टापर्थी उन चुनिंदा वैश्विक स्थलों में शामिल होने वाला है जहां से पांचवीं पीढ़ी का विमान उड़ान भरेगा। यह एक ऐसे विमान की जन्मस्थली बनेगा जो पलक झपकते ही दुश्मन को नष्ट करने में सक्षम होगा।

भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) की 480 करोड़ रुपये की परियोजना, नौसेना प्रणाली निर्माण सुविधा, स्वदेशी वाहनों, जलमग्न प्रतिवाद प्रणालियों (हमला रोकने) और अगली पीढ़ी के टॉरपीडो पर ध्यान केंद्रित करेगी। यहां कई महत्वपूर्ण घटकों और उप-प्रणालियों का निर्माण होगा जिन्हें देश अब तक विदेशों से आयात करता रहा है। रक्षा मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना भारतीय नौसेना की क्षमता अत्यंत बढ़ाएगी और देश की समुद्र जनित अर्थव्यवस्था और समुद्री सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी।

भारत फोर्ज लिमिटेड की सहायक कंपनी अग्नेयास्त्र एनर्जेटिक्स लिमिटेड की डिफेंस एनर्जेटिक्स फैसिलिटी 1,500 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित की जा रही है। राजनाथ सिंह ने आशा व्यक्त की कि यह सुविधा ऐसे हथियारों का निर्माण करेगी जो भविष्य के युद्धों के लिए भारत की तैयारी सुदृढ़ बनाएंगे।

एचएफसीएल लिमिटेड का गोला-बारूद और इलेक्ट्रिक फ्यूज संयंत्र लगभग 1,200 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित किया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने फ्यूज को किसी भी गोला-बारूद का सबसे महत्वपूर्ण घटक बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना देश में गोला-बारूद निर्माण आत्मनिर्भरता में नए अध्याय की शुरुआत करेगी। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र में निर्मित अत्याधुनिक फ्यूज हमारी रक्षा बलों की क्षमता काफी मजबूत बनाएंगे।

आगामी ड्रोन सिटी स्थापित किए जाने के बारे में राजनाथ सिंह ने युवा उद्यमियों की सहयोगात्मक सोच की सराहना करते हुए कहा कि ये इकाइयां, भले ही व्यक्तिगत रूप से लघु हों पर, मेक-इन-इंडिया के सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक आधुनिक युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा रही है। इसके अलावा, अन्य क्षेत्रों में भी इसकी उपयोगिता तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यहां उत्पादित ड्रोन वैश्विक स्तर पर भारत की उत्कृष्टता का झंडा बुलंद करेंगे। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जिस प्रकार सूरत को डायमंड सिटी और बेंगलुरु को भारत की सिलिकॉन वैली के रूप में जाना जाता है, उसी प्रकार यह क्षेत्र जल्द ही देश के ड्रोन हब’ के रूप में पहचाना जाएगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच की खाई को पाटने का प्रयास किया है और आज देश न केवल समग्र सरकारी दृष्टिकोण से, बल्कि समग्र राष्ट्र और समग्र जन दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है। चाहे कोई व्यक्तिगत नवप्रवर्तक हो, कोई बड़ा निगम, कोई स्टार्टअप हो या कोई लघु एवं मध्यम उद्यम हो, इनमें से हर इकाई राष्ट्रीय सुरक्षा में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल ने रक्षा विनिर्माण को सफलतापूर्वक एक जन आंदोलन में बदल दिया है।

सरकार के प्रयासों से हासिल प्रगति का ब्योरा देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन 2014 के मात्र 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर अब लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रक्षा उत्पादन एक-दो महीने में 1.75 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू लेगा। उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात एक दशक पहले लगभग 600 करोड़ रुपये था वह आज लगभग 40,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

रक्षा मंत्री ने संबोधन का समापन करते हुए लोगों से गलत सूचनाओं के इस दौर में सतर्क रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक नहीं कि हमारे शत्रु हम पर केवल हथियारों से ही हमला करें, वे अफवाहें या गलत सूचनाएं फैलाकर भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। वे ऐसी अफवाहें फैला सकते हैं कि देश में तेल खत्म हो गया है या कोई आपदा आने वाली है। यह सब देश में अराजकता और अव्यवस्था फैलाने के गलत इरादे से किया जाता है। उन्होंने कहा कि हमें अत्यंत सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि छोटी गलत सूचना भी हानिकारक साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री ने हमें सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने या ईंधन बचाने की सलाह दी है, तो इसे बेहतर सलाह के रूप में ही लेनी चाहिए।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि राष्ट्र निर्माण का कार्य सामूहिक प्रयासों से ही पूरा होता है। उन्होंने आह्वान किया कि आइए हम सब मिलकर एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करें जो स्वयं की रक्षा करते हुए सार्वभौमिक बंधुत्व की भावना से संपूर्ण विश्व को सहायता प्रदान करने में सक्षम हो।

इस अवसर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्र बाबू नायडू ने अपने संबोधन में भारत की रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने और स्वदेशीकरण एवं आत्मनिर्भरता पर निरंतर ध्यान केंद्रित करते हुए सेना के आधुनिकीकरण के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुधारों, निवेश और नवाचार पर निरंतर जोर देने से रक्षा एवं अंतरिक्ष क्षेत्रों में राष्ट्र की तैयारी और वैश्विक स्तर पर उसकी स्थिति व्यापक हुई है।

मुख्यमंत्री नायडू ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बढ़ती शक्ति और तकनीकी प्रगति का गौरवपूर्ण उदाहरण और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बड़ी सफलता बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिन सुविधाओं की आधारशिला रखी गई है, वे देश की रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ बनाएंगी और क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देंगी।

मुख्यमंत्री नायडू ने उद्योगों और उद्यमियों से आंध्र प्रदेश में डिजाइन करने, आंध्र प्रदेश में निर्माण करने, आंध्र प्रदेश से नेतृत्व करने का आह्वान किया और इसमें राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि नया आंध्र प्रदेश तीन मजबूत स्तंभों – नवाचार, अवसंरचना और औद्योगीकरण के बल पर निर्मित हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर होने में आंध्र प्रदेश अग्रणी भूमिका निभाएगा।

इस अवसर पर नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू, आंध्र प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहें।

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