रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बर्लिन में जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसका उद्देश्य यूरोपीय राष्ट्र के साथ रणनीतिक रक्षा साझेदारी को और मजबूत करना था। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा एवं सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा की। विशेष रूप से रक्षा उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों यानी कि विशेषकर उन्नत एवं विशिष्ट प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके साथ ही, दोनों मंत्रियों ने सैन्य सहयोग को रणनीतिक साझेदारी के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इस बैठक के दौरान भारत व जर्मनी के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप तथा संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा प्रशिक्षण में सहयोग के लिए कार्यान्वयन व्यवस्था पर हस्ताक्षर किए गए और उनका आदान-प्रदान किया गया। रक्षा मंत्री ने जर्मनी की अपनी यात्रा को गहरी मित्रता, तालमेल और विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में विशेषकर बोरिस पिस्टोरियस के जर्मनी के रक्षा मंत्री का पदभार संभालने के बाद, रक्षा सहयोग में इस साझेदारी को काफी गति मिली है।
राजनाथ सिंह ने बताया कि हाल ही में हुए भारत-यूरोपीय संघ सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी समझौते ने सामूहिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह समझौता भारत और यूरोपीय देशों के बीच रणनीतिक तालमेल को नई दिशा प्रदान करेगा। दोनों मंत्रियों ने क्षेत्रीय स्थिरता को सुदृढ़ करने, संयुक्त क्षमताओं को बढ़ाने तथा भारत-जर्मनी के दीर्घकालिक रणनीतिक गठबंधन को और मजबूत करने हेतु इस ढांचे का द्विपक्षीय एवं व्यापक यूरोपीय संदर्भ में प्रभावी उपयोग करने पर सहमति व्यक्त की।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत व जर्मनी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बेहद जरूरी स्थिरता और मजबूती प्रदान की है। आतंकवाद के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इसके सभी प्रारूपों और अभिव्यक्तियों की बिना किसी अपवाद या औचित्य के निंदा की जानी चाहिए।
जर्मन रक्षा मंत्री ने सेवा स्तरीय कार्मिक वार्ता और भविष्य के द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों के संस्थागतकरण की सराहना की। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत इस वर्ष सितंबर/अक्टूबर में भारत में आयोजित होने वाले पूर्व तरंग शक्ति अभ्यास के अगले संस्करण में जर्मन वायु सेना की भागीदारी के लिए उत्सुक है।
बैठक से पहले, राजनाथ सिंह के जर्मन रक्षा मंत्रालय पहुंचने पर उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
इससे पहले, रक्षा मंत्री ने सम्मान के प्रतीक के रूप में बुंडेसवेहर स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्मारक उन सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
भारत और जर्मनी ने अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं, जबकि वर्ष 2026 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं। आज के समय में यह द्विपक्षीय संबंध एक व्यापक और बहुआयामी स्वरूप ले चुके हैं। रक्षा सहयोग के अलावा, इसमें व्यापार और निवेश, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, विकास सहयोग, हरित ऊर्जा, उच्च शिक्षा, सतत समाधान, संस्कृति तथा जन-से-जन संबंध जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। यह साझेदारी न केवल अपनी गहराई और व्यापकता को दर्शाती है, बल्कि भविष्य में मौजूद अपार संभावनाओं एवं सहयोग के नए आयामों की ओर भी संकेत करती है।
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