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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एयरो इंडिया 2025 से पहले नई दिल्ली में राजदूतों के साथ गोलमेज बैठक की अध्यक्षता की

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मौजूदा समय में कई तरह के संघर्ष और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा सुरक्षा माहौल में वैश्विक समुदाय के बीच एकजुटता बढ़ाने का आह्वान किया है। रक्षा मंत्री ने 10 जनवरी, 2025 को नई दिल्ली में एयरो इंडिया 2025 के शुभारंभ के तौर पर आयोजित राजदूतों की गोलमेज बैठक को संबोधित करते हुए परस्पर समृद्धि और वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा भू-राजनीतिक तनावों को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

राजनाथ सिंह ने कार्यक्रम में भाग लेने वाले विभिन्न देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों से कहा, “यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि समान विचारधारा वाले देश शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक कार्रवाई के लिए मिलकर प्रयास करें। इनके बिना, हमारी भावी पीढ़ियां आज के युग में हमारे द्वारा अनुभव किए जा रहे आर्थिक विकास या तकनीकी नवाचारों का लाभ नहीं उठा पाएंगी।”

रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत वैश्विक दक्षिण के लिए एक अग्रणी आवाज के रूप में उभर रहा है, और यह एक बहुविध तालमेल आधारित नीति से प्रेरित दृष्टिकोण की वकालत करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि समृद्धि की सामूहिक खोज में विविध चिंतनों पर विचार किया जाए। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पांच मार्गदर्शक सिद्धांतों के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की है: सम्मान, संवाद, सहयोग, शांति और समृद्धि। आज के भू-राजनीतिक परिदृश्य में समकालीन चुनौतियों का समाधान करते हुए आपसी समृद्धि और शांति सुनिश्चित करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों के बीच एकता को बढ़ावा देना आवश्यक है। भारत ने हमेशा वसुधैव कुटुम्बकम, ‘एक पृथ्वी, एक परिवार’ के मूल सिद्धांत के आधार पर साझा समृद्धि और साझा जिम्मेदारी का समर्थन किया है, जो 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन का विषय भी था।”

राजनाथ सिंह ने एशिया के सबसे बड़े एयरो शो- एयरो इंडिया को एक ऐसा आयोजन बताया, जहां देश एक साथ आते हैं और सीमाओं से परे संबंध कायम करते हैं। द्विवार्षिक आयोजन के पीछे के दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों के लिए अपने उत्पादों/प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए मिलन स्थल साबित हुआ है। उन्होंने इसे विभिन्न उद्योगों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त विकास और सह-उत्पादन के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में रणनीतिक साझेदारी बनाने के लिए एक मंच के रूप में परिभाषित किया।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज भारत के पास एशिया में सबसे बड़े रक्षा औद्योगिक इको-सिस्टम में से एक है तथा सरकार क्षमताओं को और भी अधिक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र नए उद्यम एवं साझेदारी स्थापित करने की इच्छुक विदेशी कंपनियों के लिए एक लाभदायक अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के बीच सहयोग के माध्यम से भारतीय वायु सेना के लिए सी-295 परिवहन विमान की विनिर्माण संयंत्र की स्थापना के रूप में महत्वपूर्ण उपलब्धि के बारे में बताया।

राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि एयरो इंडिया 2025 मित्र देशों के लिए रक्षा क्षेत्र में ताकत और क्षमताओं का संयुक्त रूप से पता लगाने का अवसर प्रस्तुत करता है, जो रणनीतिक जरूरतों के साथ-साथ सामरिक आवश्यकताओं को भी पूरा करता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन उद्योग जगत के दिग्गजों, प्रौद्योगिकी क्षेत्र की हस्तियों, बुद्धिजीवियों और उद्यमियों को रक्षा औद्योगिक उद्यमों में सहयोग के नए रास्ते प्रदान करेगा। उन्होंने कहा, “एयरो इंडिया 2025 साझेदारी की खोज के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में काम करेगा, जो भविष्य की चुनौतियों का आधार बनेगा। साथ मिलकर, हम विकास के लिए समावेशी और टिकाऊ रास्ते बना सकते हैं।”

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वायु और अंतरिक्ष शक्ति रणनीति बनाने में महत्वपूर्ण तत्व बन गए हैं, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग सिस्टम के साथ शामिल ऐसी संपत्तियां युद्ध के मैदान में अभूतपूर्व लाभ प्रदान करती हैं। उन्होंने एयरो स्पेस पावर को सैन्य प्रभुत्व की नई सीमा के रूप में वर्णित किया, जो रणनीतिक तौर पर प्रतिरोधक के रूप में कार्य करती है।

रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में रणनीतिक साझेदारी तथा तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता पर भारत के फोकस पर प्रकाश डालते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा, “हाल के वर्षों में, सरकार ने एक मजबूत रक्षा उद्योग संबंधी इको-सिस्टम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी नीतिगत सुधार किए हैं। इसमें घरेलू डिजाइन, विकास, विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने वाली पहल शामिल हैं। इसके रणनीतिक महत्व और विशाल क्षमता को पहचानते हुए, सरकार ने एयरोस्पेस को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रमुख क्षेत्रों में से एक के रूप में नामित किया है। इसके परिणामस्वरूप, भारत में एयरोस्पेस और रक्षा सार्वजनिक एवं निजी उद्योग दोनों की भागीदारी से अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने एयरो इंडिया 2025 में विभिन्न देशों के मंत्रियों, अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करने और सहयोग बढ़ाने के लिए नए क्षेत्रों की खोज करने के लिए इस मंच का उपयोग करने की आशा व्यक्त की।

गोलमेज सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के राजदूतों और उच्चायुक्तों को एयरो इंडिया 2025 के प्रमुख कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी गई और रक्षा मंत्री की ओर से उनके शीर्ष नेतृत्व को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया गया। इस गोलमेज सम्मेलन में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, सचिव (रक्षा उत्पादन) संजीव कुमार और रक्षा मंत्रालय तथा कर्नाटक सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

एयरो इंडिया 2025 के बारे में

15वां एयरो इंडिया 10 से 14 फरवरी, 2025 तक कर्नाटक के बेंगलुरु में एयरफोर्स स्टेशन, येलहंका में आयोजित होने वाला है। पांच दिवसीय कार्यक्रम में एक कर्टन रेजर इवेंट, उद्घाटन समारोह, रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन, सीईओ राउंड-टेबल, आईडीईएक्स स्टार्ट-अप इवेंट, शानदार एयर शो, इंडिया पैवेलियन से युक्त एक बड़ा प्रदर्शनी क्षेत्र और एयरोस्पेस कंपनियों का एक व्यापार मेला शामिल है। इसका मुख्य विषय ‘अपार अवसरों का मार्ग’ है।

कार्यक्रम के पहले तीन दिन (10, 11 और 12 फरवरी) व्यावसायिक दिन होंगे, जबकि 13 और 14 फरवरी को सार्वजनिक दिन के रूप में निर्धारित किया गया है, ताकि लोग शो देख सकें। यह कार्यक्रम विदेशी और भारतीय फर्मों के बीच साझेदारी बनाने और स्वदेशीकरण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखला में नए रास्ते खोजने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

एयरो इंडिया में एयरोस्पेस और रक्षा के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी उद्योगों से बड़ी संख्या में प्रदर्शक भाग लेते हैं। यह उद्योग को लक्षित दर्शकों के सामने अपनी क्षमताओं, उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। यह द्विवार्षिक कार्यक्रम उद्योग जगत के दिग्गजों के लिए एयरोस्पेस और रक्षा उद्योगों के भविष्य को जोड़ने और आकार देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है।

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