भारत

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का अनावरण किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के लिए दो महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों का अनावरण किया है। इनका उद्देश्य अधिकारियों की भर्ती और सेवा शर्तों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और ड्यूटी के दौरान समुद्र में लापता हुए कर्मियों के परिवारों को अनुग्रह राशि प्रदान करने की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि और अन्य वरिष्ठ अधिकारी 28 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री ने पिछले पांच दशकों में आईसीजी की असाधारण सेवा की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ये दूरदर्शी नीतियां बल के मनोबल और प्रचालनगत क्षमता को और सुदृढ़ करेंगी, क्योंकि यह 2027 में अपनी स्वर्ण जयंती की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आईसीजी को एक आधुनिक, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार समुद्री बल के रूप में मजबूत करने के संकल्प की पुष्टि की।

जेंडर-न्यूट्रल प्रवेश एवं कैरियर प्रगति

पहली नीति निर्देश आईसीजी में अधिकारियों की भर्ती के लिए जेंडर-न्यूट्रल ढांचा लागू करके एक व्यापक, महिला-केंद्रित दृष्टिकोण स्थापित करती है। नीति की मुख्य विशेषताओं में महिला उम्मीदवारों को उनके पुरुष समकक्षों के समान अल्पकालिक सेवा नियुक्तियों (एसएसए) और स्थायी नियुक्तियों (पीए) में शामिल करना शामिल है। एसएसए का विकल्प पुरुष उम्मीदवारों के लिए भी खोल दिया गया है।

यह नीति प्रारंभिक प्रशिक्षण चरण से ही कैरियर में प्रगति के समान अवसर सुनिश्चित करती है। विद्यमान महिला पीए अधिकारियों को भी पात्रता शर्तों की पूर्ति के अधीन उच्च पदों पर पदोन्नति के लिए विचार किया जाएगा। एसएसए पर कार्यरत वर्तमान महिला अधिकारियों को भी निर्धारित शर्तों की पूर्ति के अधीन अपनी सेवा को पीए में परिवर्तित करने का विकल्प प्रदान किया जाएगा। यह प्रगतिशील कदम नारी शक्ति और राष्ट्र के समुद्री सुरक्षा तंत्र में समान अवसर के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

समुद्र में लापता कर्मियों के लिए अनुग्रह राशि देने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया

दूसरे नीतिगत सुधार से उन कर्मियों के परिजनों को राहत और प्रशासनिक सुगमता मिलेगी, जो दुर्भाग्यवश कर्तव्य निभाते हुए समुद्र में लापता हो जाते हैं। इस नीति की प्रमुख विशेषताओं में से एक यह अधिकार है कि कर्तव्य के दौरान समुद्र में लापता हुए आईसीजी कर्मियों को अनुग्रह राशि के भुगतान हेतु ‘मृत मान लिया जाए।’ यह सुधार परिजनों को अनुग्रह राशि और अंतिम लाभ प्रदान करने की प्रक्रिया को अत्यधिक सरल और त्वरित बनाता है। यह उपाय सुनिश्चित करता है कि मानसिक आघात के समय वीर कर्मियों के परिवारों को लंबे प्रशासनिक विलंब का सामना न करना पड़े।

Editor

Recent Posts

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ स्टाफ नियुक्त किया

अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने स्टीफन मिलर को व्हाइट हाउस का नया चीफ ऑफ…

3 घंटे ago

अयोध्या में आज दीपोत्सव का दसवां संस्करण मनाया जाएगा

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आज दीपोत्सव का दसवां संस्करण मनाया जाएगा। इस वर्ष दीपोत्सव…

3 घंटे ago

भारत और यूरोपीय संघ ने 93 अरब 50 करोड़ यूरो के होराइजन यूरोप प्रोग्राम पर बातचीत पूरी की

भारत और यूरोपीय संघ ने हॉराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की भागीदारी को लेकर बातचीत…

6 घंटे ago

सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 16 फरवरी 2027 से शुरू होंगी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड-सीबीएसई ने वर्ष 2027 की 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं…

6 घंटे ago

अंडमान और निकोबार कमान में पहले बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास का सफलतापूर्वक समापन

पहला बिम्सटेक समुद्री सुरक्षा अभ्यास 3 नवंबर, 2026 को श्री विजय पुरम में सफलतापूर्वक संपन्न…

6 घंटे ago