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भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में लघु जलविद्युत की विशिष्ट भूमिका: श्रीपाद येसो नाइक

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने आज नई दिल्ली में भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026 तथा लघु जलविद्युत सत्र के पूर्वावलोकन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में लघु जलविद्युत की विशिष्ट भूमिका है। श्रीपाद येसो नाइक नाइक ने कहा कि लघु जलविद्युत दूरस्थ क्षेत्रों में ऊर्जा सुरक्षा, विकेंद्रीकृत उत्पादन, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान दे सकती है।

श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत के पारंपरिक से स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में उल्‍लेखनीय बदलाव आया है, जिससे देश वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में अग्रणी बन गया है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक विकास, तकनीकी प्रगति और रोजगार सृजन का प्रमुख साधन बनकर उभरी है।

श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन से प्राप्‍त होने वाली विद्युत में 300 गीगावाट से अधिक स्‍थापन क्षमता हासिल कर ली है। उन्होंने कहा कि भारत के ऊर्जा परिवर्तन की शक्ति देश की भौगोलिक स्थिति, संसाधनों और विकास आवश्‍यकताओं के अनुरूप विविध, संतुलित और सुदृढ ऊर्जा पोर्टफोलियो निर्माण में निहित है।

इस संदर्भ में श्रीपाद येसो नाइक ने लघु जलविद्युत की अपार संभावनाओं पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा आंकलित लघु जलविद्युत क्षमता लगभग 21 गीगावाट है, जो 7,100 से अधिक निर्दिष्‍ट स्थलों में व्‍याप्‍त है। इसमें से अभी मात्र लगभग 5.2 गीगावाट का ही उपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा इसी वजह से इस क्षेत्र में आगे विकास की अपार संभावनाएं हैं।

श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि लघु जलविद्युत का महत्व उत्पादन क्षमता बढ़ाने से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा कि जहां भी तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टि से संभव हो उचित रूप से तैयार नदी-आधारित परियोजनाएं, नवीकरणीय ऊर्जा का विकल्प प्रदान कर सकती हैं। इसमें अपेक्षाकृत कम भूमि की आवश्यकता होती है और बड़े जलाशय-आधारित परियोजनाओं से जुड़े बड़े स्‍तर पर जलमग्नता और विस्थापन से बचा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लघु जलविद्युत परियोजनाएं खपत योग्‍य नवीकरणीय बिजली उपलब्ध करा सकती हैं, विकेंद्रीकृत उत्पादन व्‍यवस्‍था मजबूत बना सकती हैं और विशेष रूप से भौगोलिक चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था मजबूत करने में महत्‍वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। लघु जलविद्युत क्षेत्र, रोजगार सृजन और स्थानीय उद्यमों को सहयोग देकर दूरस्थ क्षेत्रों में आर्थिक विकास ला सकता है और स्थानीय समुदायों और पर्यावरण के प्रति संतुलन रख सकता है।

श्रीपाद येसो नाइक ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित लघु जल विद्युत विकास योजना का उल्‍लेख किया, जिसमें 2,584.60 करोड़ रुपये के परिव्यय से लगभग 1,500 मेगावाट की नई लघु जल विद्युत क्षमता निर्माण का लक्ष्य है। इस योजना के तहत राज्यों को लगभग 200 परियोजनाओं के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार देने को प्रोत्‍साहित किया जाएगा, जिससे भविष्य के लिए कई लघु जल विद्युत परियोजनाएं तैयार होंगी।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत राज्य मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि केवल सरकारी सहायता से इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हो सकता। उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, विकासकर्ताओं, वित्तीय संस्थानों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निवेशकों के बीच मजबूत साझेदारी का आह्वान किया। उन्होंने नीतिगत निरंतरता, सुव्यवस्थित अनुमोदन प्रक्रिया, व्यापार सुगमता में सुधार, केंद्र सरकार और राज्यों के बीच समन्‍वय और परियोजनाओं की बेहतर ऋणयोग्यता की आवश्यकता पर बल दिया।

श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि यह पूर्वालोकन कार्यक्रम महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श की शुरुआत है कि भारत अपनी लघु जलविद्युत क्षमता का पूर्ण और बेहतर उपयोग कैसे कर सकता है। उन्होंने कहा कि 2 से 5 नवंबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित होने वाले भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026 में लघु जलविद्युत पर समर्पित सत्र-नीतिगत सुधारों, निवेश, वित्तपोषण, प्रौद्योगिकी और साझेदारी पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करेगा।

श्रीपाद येसो नाइक ने राष्‍ट्रीय महत्‍व के इस आयोजन में सभी हितधारकों को भाग लेने तथा स्वच्छ, मजबूत, आत्मनिर्भर और संवहनीय भारत के निर्माण में भारत की नदी प्रणालियों, भौगोलिक विविधता, स्वदेशी तकनीकी क्षमता और आधुनिक नवाचार के साथ मिलकर काम करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने हितधारकों को आगामी भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन और एक्सपो 2026 में बड़ी संख्या में भाग लेने का निमंत्रण दिया।

संतोष कुमार सारंगी ने जलविद्युत परियोजनाएं आरंभ होने में लगने वाले लंबे समय को प्रमुख चुनौती बताया। उन्‍होंने कहा कि वन, पर्यावरण और मार्ग संबंधी स्‍वीकृति में देरी से समय पर परियोजना का क्रियान्वयन प्रभावि‍त होता है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से छोटी जलविद्युत परियोजनाओं के लिए नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने समय पर स्‍वीकृति का आश्वासन दिया है, फिर भी अनुचित देरी की स्थिति में इस पर ध्‍यान देने और परियोजना आगे बढ़ाने के लिए एक तंत्र विकसित करने की आवश्‍यकता है।

लघु जलविद्युत परियोजनाओं की ऋण योग्यता में सुधार आवश्यकता पर जोर देते हुए संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि इसकी विशिष्‍ट नकदी प्रवाह संरचना के कारण धैर्य के साथ दीर्घकालिक पूंजी की आवश्यकता होती है। उन्होंने भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी-आईआरईडीए से आग्रह किया कि वह बैंकों और एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक सहित बहुपक्षीय विकास संगठनों के साथ मिलकर परियोजना विकासकर्ताओं के लिए दीर्घकालिक पूंजी की अधिक उपलब्धता सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभाए।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव ने हितधारकों से अपने विचार और अनुभव साझा करने और देश में जलविद्युत, विशेष रूप से लघु जलविद्युत परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए सुझाव देने को कहा ।

पूर्वावलोकन समारोह में वरिष्ठ अधिकारियों, अनुसंधान और उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधियों सहित कई हितधारक ने भाग लिया।

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