विदेश मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कहा है कि भारत ने मानवाधिकारों के संरक्षण के लिए सदैव सक्रिय भूमिका निभाई है। डॉक्टर जयशंकर ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 58वें सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण अपने भागीदारों की प्राथमिकताओं के अनुरूप क्षमता निर्माण और मानव संसाधनों तथा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद से निपटने में दृढ़ और समझौता न करने वाला देश है। विदेशमंत्री ने कहा कि समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करने वाली बहुपक्षीय प्रणाली की स्पष्ट और तत्काल आवश्यकता है।
गृह मंत्रालय ने जनगणना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत जनगणना (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए हैं।…
भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया है।…
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग-एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के अंबड औद्योगिक क्षेत्र के निकट दत्तानगर…
भारत और मंगोलिया के रक्षा मंत्रालयों के संयुक्त कार्य समूह की आज उलानबातार में आयोजित…
भारत की क्वांटम प्रौद्योगिकी और सुरक्षित संचार क्षमताओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण…
भारतीय प्रेस परिषद ने विरोध और धरना-प्रदर्शनों की कवरेज करने वाले पत्रकारों के लिए दिशा-निर्देश…