विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा है कि मौजूदा संघर्षों के बीच सभी पक्ष संयम बरतें, तनाव कम करें और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने ऊर्जा और व्यापार की आपूर्ति जारी रखने पर भी बल दिया। संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए डॉ. जयशंकर ने कहा कि युद्ध का असर सिर्फ संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और विकास प्रभावित होता है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह युद्ध अब भी अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संघर्ष समाप्त करने के आह्वान को दोहराया। खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर विदेश मंत्री ने कहा कि मौजूदा संघर्ष ने स्थिति को और कठिन बना दिया है। उन्होंने वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमलों को अस्वीकार्य बताया। आतंकवाद पर डॉ. जयशंकर ने कहा कि भारत को आतंकवाद से अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है।
उन्होंने सीमा पार आतंकवाद को वैश्विक व्यवस्था के लिए सीधी चुनौती बताया और आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक दक्षिण के सामने खाद्य, ईंधन, उर्वरक और वित्त से जुड़ी बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने बताया कि भारत 78 देशों में करीब 600 विकास परियोजनाओं में सहयोग कर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर डॉ. जयशंकर ने कहा कि हर देश को अपनी जरूरतों के अनुसार एआई विकसित करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक दक्षिण के साथ अपनी साझेदारी में एआई को भी शामिल करेगा।
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