प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 116वें एपिसोड के दौरान, भारत के समुद्री इतिहास में लोथल के महत्व पर बल दिया। विश्व के पहले डॉकयार्ड के स्थल के रूप में जाना जाने वाला लोथल, अब बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के निर्माण का साक्षी बन रहा है, जो भारत के 5000 वर्ष पुराने समुद्री इतिहास, जिसकी शुरुआत हड़प्पा सभ्यता से हुई थी, को प्रदर्शित करने के लिए समर्पित एक भव्य संग्रहालय है।
इस पहल पर बोलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “लोथल भारत की समुद्री प्रतिभा और प्राचीन व्यापारिक क्षमताओं पर गर्व का एक प्रतीक है। यहां विकसित किया जा रहा संग्रहालय हमारी समृद्ध समुद्री विरासत को सीखने और सराहने के लिए एक वैश्विक केंद्र बनेगा। मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि वे भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार के साथ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों या कलाकृतियों को संरक्षित और साझा करने में योगदान दें।”
प्रधानमंत्री ने आगे मौखिक इतिहास परियोजना का भी उल्लेख किया, जो विभाजन के बचे हुए लोगों के अनुभवों का दस्तावेजीकरण करती है। विभाजन युग के केवल कुछ ही प्रत्यक्षदर्शी शेष रह गए हैं, इस पहल का उद्देश्य उनकी कहानियों को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित करना है।
अपनी प्राचीन विरासत को संरक्षित करने के भारत में चल रहे अभियान के हिस्से के रूप में, प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों को इन प्रयासों में योगदान करके और भारत के समुद्री और सांस्कृतिक इतिहास की विरासत को सुरक्षित रखने को सुनिश्चित करके सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
कई प्रदर्शनियों, इंटरैक्टिव प्रदर्शनों और शैक्षिक कार्यक्रमों को दिखाने के लिए तैयार, एनएमएचसी के एक प्रमुख पर्यटन स्थल बनने की उम्मीद है, जो विश्व स्तर पर आगंतुकों को आकर्षित करेगा और भारत की समुद्री विरासत को और अधिक प्रशंसनीय बनाने बढ़ावा देगा। परियोजना के चरण 1A के लिए भौतिक प्रगति 57% तक पहुँच गई है, जो इसके विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
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